"वसन्त पञ्चमी" के अवतरणों में अंतर

सम्पादन सारांश रहित
(2409:4043:2311:D64F:78C6:74B1:454E:3FA0 (वार्ता) द्वारा किए बदलाव 5102186 को पूर्ववत किया)
टैग: किए हुए कार्य को पूर्ववत करना
}}
 
'''वसंत पञ्चमी''' या '''श्रीपंचमी''' एक [[हिन्दू]] का त्योहार है। इस दिन [[विद्या]] की [[देवी]] [[सरस्वती]] की [[पूजा]] की जाती है। यह पूजा पूर्वी भारत, पश्चिमोत्तर [[बांग्लादेश]], [[नेपाल]] और कई राष्ट्रों में बड़े उल्लास से मनायी जाती है। इस दिन [[पीला|पीले]] वस्त्र धारण करते हैं। प्राचीन भारत और नेपाल में पूरे साल को जिन छह मौसमों में बाँटा जाता था उनमें [[वसंत]] लोगों का सबसे मनचाहा मौसम था। जब फूलों पर बहार आ जाती, खेतों में [[सरसों]] का फूल मानो सोना चमकने लगता, [[जौ]] और [[गेहूँ]] की बालियाँ खिलने लगतीं, [[आम|आमों]] के पेड़ों पर मांजर आ जाता और हर तरफ़ रंग-बिरंगी [[तितली|तितलियाँ]] मँडराने लगतीं। भर भर भंवरे भंवराने लगते। वसंत ऋतु का स्वागत करने के लिए [[माघ]] महीने के पाँचवे दिन एक बड़ा जश्न मनाया जाता था जिसमें [[विष्णु]] और [[कामदेव]] की पूजा होती हैं। यह वसंत पंचमी का त्यौहार कहलाता था। शास्त्रों में बसंत पंचमी को ऋषि पंचमी से उल्लेखित किया गया है, तो पुराणों-शास्त्रों तथा अनेक काव्यग्रंथों में भी अलग-अलग ढंग से इसका चित्रण मिलता है।
 
प्राचीन भारत और नेपाल में पूरे साल को जिन छह मौसमों में बाँटा जाता था उनमें [[वसंत]] लोगों का सबसे मनचाहा मौसम था। जब फूलों पर बहार आ जाती, खेतों में [[सरसों]] का फूल मानो सोना चमकने लगता, [[जौ]] और [[गेहूँ]] की बालियाँ खिलने लगतीं, [[आम|आमों]] के पेड़ों पर मांजर आ जाता और हर तरफ़ रंग-बिरंगी [[तितली|तितलियाँ]] मँडराने लगतीं। भर भर भंवरे भंवराने लगते। वसंत ऋतु का स्वागत करने के लिए [[माघ]] महीने के पाँचवे दिन एक बड़ा जश्न मनाया जाता था जिसमें [[विष्णु]] और [[कामदेव]] की पूजा होती हैं। यह वसंत पंचमी का त्यौहार कहलाता था। शास्त्रों में बसंत पंचमी को ऋषि पंचमी से उल्लेखित किया गया है, तो पुराणों-शास्त्रों तथा अनेक काव्यग्रंथों में भी अलग-अलग ढंग से इसका चित्रण मिलता है।
 
== वसन्त पंचमी कथा ==