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== वसन्त पंचमी कथा ==
[[चित्र:Saraswati f. Strassenpuja.JPG|250px|thumb|right|[[कोलकाता]] में पूजा के लिये निर्मित देवी सरस्वती की प्रतिमा (वर्ष २०००)]]
उपनिषदों की कथा के अनुसार [[सृष्टि]] के प्रारंभिक काल में भगवान [[शिव]] की आज्ञा से भगवान ब्रह्मा ने जीवों, खासतौर पर मनुष्य योनि की रचना की। लेकिन अपनी सर्जना से वे संतुष्ट नहीं थे, उन्हें लगता था कि कुछ कमी रह गई है जिसके कारण चारों ओर मौन छाया रहता है।<ref>{{Cite web|url=http://hindi.webdunia.com/vasant-panchami-special/वसंत-पंचमी-की-प्रामाणिक-कथा-114012900084_1.htm|title=Basant Panchami Katha {{!}} वसंत पंचमी की प्रामाणिक कथा|last=WD|website=hindi.webdunia.com|language=hi|access-date=2021-02-11}}</ref>
*तब ब्रह्मा जी ने इस समस्या के निवारण के लिए अपने कमण्डल से जल अपने हथेली में लेकर संकल्प स्वरूप उस जल को छिड़कर भगवान श्री विष्णु की स्तुति करनी आरम्भ की। ब्रम्हा जी के किये स्तुति को सुन कर भगवान [[विष्णु]] तत्काल ही उनके सम्मुख प्रकट हो गए और उनकी समस्या जानकर भगवान विष्णु ने [[आदिशक्ति]] [[दुर्गा]] माता का आव्हान किया। विष्णु जी के द्वारा आव्हान होने के कारण भगवती दुर्गा वहां तुरंत ही प्रकट हो गयीं तब ब्रम्हा एवं विष्णु जी ने उन्हें इस संकट को दूर करने का निवेदन किया।<ref>{{Cite web |url=https://vedpuran.net/download-all-ved-and-puran-pdf-hindi-free/comment-page-5/#comments |title=संग्रहीत प्रति |access-date=29 जनवरी 2020 |archive-url=https://web.archive.org/web/20180728152947/https://vedpuran.net/download-all-ved-and-puran-pdf-hindi-free/comment-page-5/#comments |archive-date=28 जुलाई 2018 |url-status=dead }}</ref>
*ब्रम्हा जी तथा विष्णु जी बातों को सुनने के बाद उसी क्षण आदिशक्ति दुर्गा माता के शरीर से स्वेत रंग का एक भारी तेज उत्पन्न हुआ जो एक दिव्य नारी के रूप में बदल गया। यह स्वरूप एक चतुर्भुजी सुंदर स्त्री का था जिनके एक हाथ में वीणा तथा दूसरा हाथ में वर मुद्रा थे । अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी। आदिशक्ति श्री दुर्गा के शरीर से उत्पन्न तेज से प्रकट होते ही उन देवी ने वीणा का मधुरनाद किया जिससे संसार के समस्त जीव-जन्तुओं को वाणी प्राप्त हो गई। जलधारा में कोलाहल व्याप्त हो गया। पवन चलने से सरसराहट होने लगी। तब सभी देवताओं ने शब्द और रस का संचार कर देने वाली उन देवी को वाणी की अधिष्ठात्री देवी "सरस्वती" कहा।<ref>{{Cite web |url=http://www.aryasamajjamnagar.org/vedang.htm |title=संग्रहीत प्रति |access-date=29 जनवरी 2020 |archive-url=https://web.archive.org/web/20100106153131/http://www.aryasamajjamnagar.org/vedang.htm |archive-date=6 जनवरी 2010 |url-status=live }}</ref>