"पुष्यभूति राजवंश": अवतरणों में अंतर

संजीव कुमार के अवतरण 4906372पर वापस ले जाया गया : Reverted (ट्विंकल)
टैग: किए हुए कार्य को पूर्ववत करना
→‎पुष्यभूति राजवंश: हर्षवर्धन के दरबारी कवि बाणभट्ट ने उन्हें बैस सूर्यवंशी क्षत्रिय कहा है हर्षवर्धन स्वयं को क्षत्रिय ही मानते थे
टैग: Reverted मोबाइल संपादन मोबाइल एप सम्पादन Android app edit
पंक्ति 14:
| s1 = गुर्जर प्रतिहार राजवंश
}}
'''पुष्यभूति राजवंश''' या '''वर्धन राजवंश''' ने[[बैस राजपूत]] [[भारत]] के उत्तरी भाग में ६ठी तथा ७वीं शताब्दी में शासन किया। इस वंश का सबसे प्रतापी तथा अन्तिम राजा [[हर्षवर्धन]] हुआ जिसके शासन काल में यह वंश अपने चरमोत्कर्ष पर पहुँचा। भारत का अधिकांश उत्तरी तथा पश्चिमोत्तर भाग इस समय हर्ष के साम्राज्य के अन्तर्गत था। यह साम्राज्य पूर्व में [[कामरूप]] (वर्तमान में असम) से दक्षिण में [[नर्मदा नदी]] तक फैला हुआ था। इसकी राजधानी [[कन्नौज]] थी। इस वंश का शासन ६४७ई तक रहा।<ref name="Historic Places p.507">International Dictionary of Historic Places: Asia and Oceania by Trudy Ring, Robert M. Salkin, Sharon La Boda p.507</ref>
 
==सन्दर्भ==