"तिरुवल्लुवर" के अवतरणों में अंतर

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तिरुक्कुरल तीन वर्गों में विभाजित है।
पहले खंड में ''अरम'', विवेक और सम्मान के साथ अच्छे नैतिक व्यवहार ("सही आचरण") को बताया गया है।
खंड दो में ''पारुलपोरुल'' सांसारिक मामलों की सही ढंग से चर्चा की गई है और
तीसरे अनुभाग ''इनबम'', पुरूष और महिला के बीच प्रेम संबंधों पर विचार किया गया है।
प्रथम खंड में 38 अध्याय हैं, दूसरे में 70 अध्याय और तीसरे में 25 अध्याय हैं।
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