"रविदास" के अवतरणों में अंतर

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सतगुरु रविदास जी भारत के उन विशेष महापुरुषों में से एक हैं जिन्होंने अपने आध्यात्मिक वचनों से सारे संसार को एकता, भाईचारा पर जोर दिया। रविदास जी की अनूप महिमा को देख कई राजा और रानियाँ इनकी शरण में आकर भक्ति मार्ग से जुड़े। जीवन भर समाज में फैली कुरीति जैसे जात-पात के अंत (अन्त) के लिए काम किया।
 
इनके गुरु स्वामी रामानन्द थे।
रविदास जी के सेवक इनको " '''सतगुरु'''", "'''जगतगुरु'''" आदि नामों से सत्कार करते हैं। रविदास जी की दया दृष्टि से करोड़ों लोगों का उद्धार किया जैसे: [[मीरा बाई]] आदि
 
*मन ही पूजा मन ही धूप ,मन ही सेऊँ सहज सरूप
*'''<nowiki/>'ऐसा चाहूं राज मैं''', जहां '''मिले''' सबन को '''अन्न''', छोट-बड़ो सब सम बसे, रविदास रहे प्रसन्न'
*वेद धर्म सबसे बड़ा अनुपम सच्चा ज्ञान, फिर क्यों छोड़ इसे पढ लूं झूठ कुरआन”
 
== संदर्भ ==
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