"पृथ्वीराजविजयमहाकाव्यम्" के अवतरणों में अंतर

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=== सर्ग 1 ===
 
पहला सैंटो प्राचीन कवियों [[वाल्मीकि]], [[व्यास]] और [[भासाभास]] की प्रशंसा करता है। इसमें समकालीन कवियों कृष्ण और विश्वरूप का भी उल्लेख है। कविता अजमेर के मूल निवासी विश्वरूपा और लेखक के एक मित्र और मार्गदर्शक को पुकारती है। {{sfn | हरविलास शारदा | 1935 | p = 194}}
 
कविता तब राजा की प्रशंसा करती है, [[पृथ्वीराज चौहान | पृथ्वीराज तृतीय]], जिसने कवि को बहुत सम्मान दिया। इसमें उल्लेख है कि पृथ्वीराज ने बचपन में भविष्य की महानता का वादा किया था। इसमें यह भी उल्लेख है कि राजा छह भाषाओं में कुशल था। {{sfn | हरविलास शारदा | 1935 | p = 194}}
 
इसके बाद, कविता में [[पुष्कर]], कवि के निवास की जगह, और चम्मन राजधानी [[अजमेर]] के पास एक शहर का वर्णन किया गया है। इसमें कहा गया है कि [[शिव]] को समर्पित मंदिर, अजगंधा महादेव, पुष्कर में स्थित था। कविता में, [[ब्रह्मा]] [[विष्णु]] को बताता है कि मूल रूप से उस स्थल पर तीन '' [[यज्ञ]] हैं- कुंड के (अग्नि कुंड), जो अंततः झील बन गए। {{sfn | हरविलास शारदा | 1935 | p = 194}}