"मृच्छकटिकम्" के अवतरणों में अंतर

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== कथावस्तु ==
#मृच्छकटिकम्# की कथावस्तु कवि प्रतिभा से प्रसूत है।'उज्जयिनी'का निवासी सार्थवाह विप्रवर #चारूदत्त# इस प्रकरण का नायक है और दाखनिता के कुल में उत्पन्न #वसंतसेना# नायिका है। चारूदत्त की पत्नी'धूता'पूर्वपरिग्रह के अनुसार ज्येष्ठा है जिससे चारूदत्त को'रोहितसेन'नाम का एक पुत्र है। चारूदत्त किसी समय बहुत समृद्ध था परंतु वह अपने दया-दाक्षिण्य के कारण निर्धन हो चला था,तथापि प्रामाणिकता,सौजन्य एवं औदार्य के नाते उसकी महती प्रतिष्ठा थी। वसंतसेना नगर की शोभा है-अत्यंत उदार,मनस्विनी,व्यवहारकुशला, रूपगुणसंपन्ना एवं साधारण नवयौवना नायिका उत्तम प्रकृति की है और वह आसाधारण गुणों से मुग्ध हो उस पर निर्व्याज प्रेम करती है। नायक की एक साधारण और स्वीया नायिका होने के कारण यह संकीर्ण प्रकरण माना जाता है।रूप
-गुणसंपन्ना एवं साधारण नवयौवना नायिका उत्तम प्रकृति की है और वह आसाधारण गुणों से मुग्ध हो उस पर निर्व्याज प्रेम करती है। नायक की एक साधारण और स्वीया नायिका होने के कारण यह संकीर्ण प्रकरण माना जाता है।
 
इसकी कथावस्तु तत्कालीन समाज का पूर्ण रूप से प्रतिनिधित्त्व करती है। यह केवल व्यक्तिगत विषय पर ही नहीं,अपितु इस युग की शासन-व्यवस्था एवं राज्य-स्थिति पर भी प्रचुर प्रकाश डालता है। साथ- ही-साथ वह नागरिक-जीवन का भी यथावत् चित्र अंकित करता है।
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