"हदीस" के अवतरणों में अंतर

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हज़रत पैगम्बर मुहम्मद के समय उनके साथ रहने वाले [[सहाबा|उनके साथी]] उनकी बातों और उनके तरीकों को लिख या याद कर लिया करते थे इसी को हदीस कहा गया , बाद में हदीस और [[फ़िक़्ह|फ़िक़ह]] के जानकार इमामों ने इन हदीसो को संग्रहित कर किताबों का रूप दिया, हदीस इस्लाम के कुरान का प्रामाणिक व्याख्यान करने वाला ग्रंथ माना जाता है।
 
[[इस्लाम]] का [[मुहम्मद|हज़रत मुहम्मद]] [[मुहम्मद|[स्वल्लल्लाहु अलैहि वस्सल्लम]]<nowiki>] के रसूल बनने के साथ उसके विशुद्ध रूप में जब पुनः आगमन हुआ, उससे पहले के धर्म-ग्रथों में जो विकार आ गया था, उसके कई कारणों में से एक यह भी था कि ईश-वाणी, रसूल के कथन और दूसरे इन्सानों व धर्माचार्यों, उपदेशकों, वाचकों, सुधारकों और धर्मविदों आदि के कथन भी आपस में मिल-जुल गए। ईशवाणी और मनुष्य-वाणी के मिश्रण में, मूल ईश-ग्रंथ कितना है और इसके अंश कौन-कौन से हैं, यह पता लगाना असंभव हो गया था। </nowiki>[[सहाबा|पैग़म्बर]] [[मुहम्मद|[स्वल्लल्लाहु अलैहि वस्सल्लम]]<nowiki>] के साथी हज़रत अबू सलमा की बयान की गई एक हदीस के मुताबिक़ आप ने हदीस-वर्णनकर्ताओं को सख़्त चेतावनी दी थी कि</nowiki>
 
{{Quote|‘‘जो व्यक्ति मुझ से संबंध लगाकर वह बात कहे जो मैंने नहीं कही, वह अपना ठिकाना जहन्नम (नर्क) में बना ले।’’|हज़रत मुहम्मद[स्वल्लल्लाहु अलैहि वस्सल्लम] |हज़रत अबू सलमा की बयान की गई एक हदीस}}
 
== हदीस-संग्रह ==
2,338

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