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(चंद्रवंशीय ठाकुर)
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| populated_states= [[उत्तर प्रदेश]], [[मध्य प्रदेश]], [[दिल्ली]] तथा निकटवर्ती इलाके
| languages= [[हिन्दी]], [[खड़ीबोली]], [[बृजभाषा]]
| religions= [[हिन्दू]] , [[चंद्रवंशी]] ,
 
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'''हिन्दू घोषी ''' हिन्दू [ ठाकुर[अहीर]] जाति का एक समुदाय है, जो कि श्रीकृष्णहिन्दू के[[ग्वाला]] फूफासमुदाय जी राजा दमघोष के वंशज मानें हैं ब्रज क्षेत्र में इनके २७ छोटे बड़े रजवाड़े थे येका ठाकुरपर्याप्त /उपमान चौधरीमाना कहलातेजाता थे।है। हिन्दू [[जाट]] जाति मे भी घोसी उपजाति पायी जाती है।<ref name="auto">{{Cite journal | url = http://books.google.com/?id=fe88AAAAMAAJ&q=hindu+ghosi+gotra&dq=hindu+ghosi+gotra | title = History of the Jats | author1 = Joon | first1 = Ram Sarup | year = 1968|pages=115}}</ref>
 
दिल्ली व निकटतम इलाकों मे घोसी शब्द ऐतिहासिक रूप से हिन्दू व मुस्लिम समुदायों के दुग्ध-व्यवसायियों से संबन्धित है।<ref name="Balfour1871">{{cite book|author=Edward Balfour|title=Cyclopædia of India and of eastern and southern Asia, commercial, industrial and scientific: products of the mineral, vegetable and animal kingdoms, useful arts and manufactures|url=http://books.google.com/books?id=CWsIAAAAQAAJ&pg=RA2-PA157|accessdate=4 October 2012|year=1871|publisher=Scottish and Adelphi Presses|pages=2–,157|archive-url=https://web.archive.org/web/20140627041017/http://books.google.com/books?id=CWsIAAAAQAAJ&pg=RA2-PA157|archive-date=27 जून 2014|url-status=live}}</ref> परंतु, मध्य भारत मे लगभग सभी घोसी हिन्दू होते हैं जो स्वयं को घोसी ठाकुर कहते है<ref name="The Tribes and Castes of the Central Provinces of India" />
==ब्रिटिश-राज कालीन वृतांत==
[[File:Indischer Maler um 1755 002.jpg|thumb|150px|right|<center>यसोदा व नन्द जी के साथ श्रीक़ृष्ण (घोषियों के आत्मस्वीकृत पूर्वज)</Center>]]
ब्रिटिश राज प्रशासक एच॰ए॰ रोज़ ने अपनी 1911 मे लिखी पुस्तक "A Glossary of the Tribes and Castes of the Punjab and North-West Frontier Province" में बताया:
 
{{cquote|प्राचीन काल मे ग्वाला काही जाने वाली अहीर जाति के लोग जो धर्म परिवर्तन करके मुस्लिम बन गए, घोसी कहलाए परंतु यथार्थ में कोई भी गोपालक अहीर हो या गुर्जर, घोसी ही कहलाता है।<ref name="Ibbetson">{{Cite book | url = http://books.google.com/?id=1QmrSwFYe60C&pg=PA7&lpg=PA7&dq=delhi+ahir#v=onepage&q=delhi%20ahir&f=false | title = A Glossary of the Tribes and Castes of the Punjab and North-West Frontier Province | isbn = 9788120605053 | author1 = | first2 = Denzil | last2=Ibbetson | last1 = Rose | first1 = H.A | last3 =Maclagan| first3 = Edward Douglas | page = 7|year = c. 1911}}</ref>}}
 
रोज़, इब्बट्सन, डेंजिल, मकलागन, एडवर्ड डगलस (सी.1911) के अनुसार {{cquote|"सही अर्थ में कोई भी मुस्लिम जो गोपालक बन गया, घोसी कहलाया तथा बाद मे घोसी शब्द किसी भी अहीर या ग्वाले के लिए प्रयुक्त किया जाने लगा, अतः हम मुस्लिम व हिन्दू दोनों समुदायों के अहीरों को संयुक्त रूप से घोसी कहते है।<ref name="Ibbetson" />}}
 
{{cquote| हिन्दू घोषियों की सामाजिक परम्पराएँ हिन्दू राजपूतों के समरूप होती है। शादियों मे गौड़ ब्राह्मण फेरों की रस्म सम्पन्न करवाते है। घोषियों मे पंच प्रथा व वंशानुगत चौधरी प्रथा का भी प्रचलन है, यदि किसी चौधरी का कोई वैध उत्तराधिकारी नही होता है तो उसके मरणोपरांत उसकी विधवा किसी दत्तक पुत्र को उसका वंशज घोषित करती है, दत्तक पुत्र न चुने जाने की स्थिति मे पंचों द्वारा योग्य उत्तराधिकारी का चयन होता है। <ref name="Ibbetson" />}}
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