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'''चुडासमा''' अथवा '''चूड़ासमा''' भारतीय राज्य गुजरात में पायी जाने वाली एक राजपूत गौत्र है। कुछ विद्वान इन्हें [[जाडेजा]] व [[देवगिरि के यादव|देवगिरि के यादवों]] की तरह [[आभीर]] ही मानते हैं।<ref>{{cite web | url=https://books.google.co.in/books?id=gPAdAAAAMAAJ&dq=some+scholars%2C+however%2C+regard+the+jadejas+and+devgiri+yadavas+as+abhiras&focus=searchwithinvolume&q=Cudasamas+Jadejas+Abhiras | title=The Glory that was Gūrjaradeśa, Volume 2 | publisher=Bharatiya Vidya Bhavan, 1943| accessdate=8 Nov 2006| page=136}}</ref><ref>{{cite book|last= KV|first= Soundararajan|title= Junagadh|publisher= Archaeological Survey of India|page= 10|url= https://books.google.com/books?id=bPNEAAAAIAAJ&q=abhira+chudasama&dq=abhira+chudasama&hl=en&sa=X&ved=0ahUKEwi0ud2_i9jaAhVN92MKHSfxAhUQ6AEIOjAE|access-date= 3 अक्तूबर 2019|archive-url= https://web.archive.org/web/20131113154105/http://books.google.com/books?id=bPNEAAAAIAAJ|archive-date= 13 नवंबर 2013|url-status= live}}</ref><ref>{{cite book |title=Contemporary Society: Concept of Tribal Society |first=Harald Tambs|last=Lyche |chapter=Townsmen, Tenants and Tribes: War, Wildness and Wilderness in the Traditional Politics of Western India |editor1-first=S. N. |editor1-last=Ratha |editor2-first=Georg |editor2-last=Pfeffer |editor3-first=Deepak Kumar |editor3-last=Behera |publisher=Concept Publishing Company |year=2002 |pages=189–190 |isbn=978-8-17022-983-4 |url=https://books.google.com/books?id=R--XMUsk7sIC |accessdate=2012-05-21}}</ref>
'''चूड़ास्मा''' एक यदुवंशी [[राजपूत]] जाति हैं जो भारत में [[गुजरात]] राज्य में पाए जाते हैं। [[एंथ्रोपोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया]], कहते हैं कि वे "सैमा राजपूत जाति के वंशज हैं," यह समा राजपूत भगवान श्री कृष्ण के पोते "सांबा" के वंशज है। और कच्छ, जूनागढ़ और जामनगर जिलों में पाए जाते हैं। "<ref>{{cite book |title=Gujarat, Part 3 |series=People of India |first1=Kumar Suresh |last1=Singh |first2=Rajendra Behari |last2=Lal |publisher=Popular Prakashan |location=Mumbai |year=2003 |volume=XXII |page=1174|isbn=978-8-17991-106-8 |url=https://books.google.com/books?id=IWrTs5yt1DkC |accessdate=2012-05-21}}</ref>
 
[[भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण]] द्वारा किये गये स्रोतों से पता चलता है कि उनका उद्भव [[अहीर|सम्मा अहीर]] जाति से हुआ जो सम्भवतः तुर्क क्षेत्र से हैं और इसका भारत में आगमन सातवीं एवं आठवीं शताब्दी में हुआ। वर्तमान में ये लोग कच्छ, जुनागढ़ और जामनगर जिलों में निवास करते हैं।<ref>{{cite book |title=Gujarat, Part 3 |series=People of India |first1=कुमार सुरेश |last1=सिंग |first2=राजेन्द्र बेहड़ी |last2=लाल |publisher=पोप्यूलर प्रकाशन |location=मुम्बई |year=2003 |volume=XXII |page=1174 |isbn=978-8-17991-106-8 |url=http://books.google.co.uk/books?id=IWrTs5yt1DkC |access-date=14 अप्रैल 2016 |archive-url=https://web.archive.org/web/20141129235948/http://books.google.co.uk/books?id=IWrTs5yt1DkC |archive-date=29 नवंबर 2014 |url-status=live }}</ref><ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=9rgkAQAAIAAJ|title=Bombay Government Gazette|last=State)|first=Bombay (India :|date=1959-01-01|language=अंग्रेज़ी}}</ref>
इतिहासकार वीरभद्र सिंह के अनुसार, चुडासमा [[उस]] [[सिंध]] की राजधानी से आए हैं। यह समा राजपूत भगवान श्री कृष्ण के पोते "सांबा" के वंशज है चूड़ासमा राजपूतों ने 875 में [[काठियावाड़]] के प्रायद्वीप में प्रवेश किया है। 'रा' इन राजपूतों द्वारा अपनाया गया शीर्षक था।जूनागढ़ के सिंहासन के राजकुमार को 'रा' के रूप में जाना जाता था, जब तक और जब तक वह सिंहासन पर काबिज नहीं होते थे। राजवंश जुनागढ़ का सबसे लंबा शासक था.<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=kBzQAAAACAAJ|title=The Rajputs of Saurashtra|last=Singhji|first=Virbhadra|date=1994-01-01|publisher=Sangam|isbn=9780861323272|language=en}}</ref>
गुजरात के सौराष्ट्र वल्लभी राजवंश के विनाश के बाद , सौराष्ट्र क्षेत्र स्वतंत्र हो गया। इस समय के दौरान वंथली क्षेत्र पर वालाराम [[चावड़ा वंश | चावड़ा]] राजपूत राजा का शासन था। राजा वला राम के कोई पुत्र नहीं थे, और यह प्रश्न उठता है कि उनकी मृत्यु के बाद उन्हें कौन सफल होना चाहिए। उन हिंदू जनजातियों के बीच जो दक्षिण की ओर पलायन कर चुके थे, महोमेदनों के अतिक्रमण के कारण, जो सिंध में समीनगर (अब नगर थाथा) में बस गए थे। वाल राम की बहन की शादी सममा जनजाति के प्रमुख से हुई थी, और उनके बेटे रा चुडा को वामनस्थली में अपने चाचा का पालन करने के लिए चुना गया था।
तदनुसार, वाल राम की मृत्यु के समय, ए डी 875 में, रा चुडा ने चुडासमा वंश की स्थापना की, अपने पिता के गोत्र का नाम अपने नाम में जोड़ दिया।चूडास्मा जल्दी ही बहुत शक्तिशाली हो गया, और धंधुसर के एक शिलालेख से हम सीखते हैं कि सभी पड़ोसी देशों के शासकों ने उन्हें सर्वोपरि माना। राजवंश ने 875 ई। से 1473 ई। तक लगभग छह सौ वर्षों तक स्वयंवर जारी रखा। वैकल्पिक रूप से पूंजी [[वांथली]] और [[जूनागढ़]]।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=9rgkAQAAIAAJ|title=Bombay Government Gazette|last=State)|first=Bombay (India :|date=1959-01-01|language=en}}</ref>
हेराल्ड टैम्ब्स-लाइक का मानना ​​है कि किंवदंतियों के आधार पर, , गुजरात के [[सौराष्ट्र]] क्षेत्र में [[जूनागढ़]] में एक चुडासमा साम्राज्य अस्तित्व था। राजवंश परंपरागत रूप से कहा जाता है कि इसकी स्थापना 875 सीई में हुई थी<ref>{{cite book |title=Contemporary Society: Concept of Tribal Society |first=Harald Tambs|last=Lyche |chapter=Townsmen, Tenants and Tribes: War, Wildness and Wilderness in the Traditional Politics of Western India |editor1-first=S. N. |editor1-last=Ratha |editor2-first=Georg |editor2-last=Pfeffer |editor3-first=Deepak Kumar |editor3-last=Behera |publisher=Concept Publishing Company |year=2002 |pages=189–190 |isbn=978-8-17022-983-4 |url=https://books.google.com/books?id=R--XMUsk7sIC |accessdate=2012-05-21}}</ref><ref>{{cite book | url=https://books.google.com/books?id=MDUkAQAAIAAJ&focus=searchwithinvolume&q=ahir+rana | title=Encyclopaedia of folklore and folktales of South Asia |volume=10 |first=Sushil |last=Kumar | publisher=Anmol Publications |editor-first=Naresh |editor-last=Kumar | year=2003 | pages=2771 | isbn=978-8-12611-400-9}}</ref>
 
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
[[श्रेणी:भारतीय उपनाम]]
 
==सन्दर्भ==
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