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*(3) मगही (गया, पटना, तथा संथाल परगना में अंशत:) प्रमुख बोलियाँ हैं।
*(4) [[नागपुरी भाषा|नागपुरी]](झारखंड के लातेहार, चतराछात्रा, पलामूपालामु, लोहरदगालोहारदागा, गुमला, रांचीराचीं, सिमडेगा जिले, छत्तीसगढ़ के जाशपुर, उड़ीसा के सुनदरगड़ जिला)
 
मैथिली की उपबोली सिराजपुरी पूर्णिया में बोली जाती है। पूर्वी हिंदी की [[अवधी]] एवं [[छत्तीसगढ़ी भाषा|छत्तीसगढ़ी]] प्रमुख बोलियाँ हैं। अवधी लखीमपुर, सीतापुर, लखनऊ, उन्नाव, फतेहपुर बहराइच, बाराबंकी, रायबरेली, गोंडा, फैजाबाद, सुलतानपुर, प्रतापगढ़ जौनपुर, मिर्जापुर जिलों की बोली है। इसमें बाँदा भी गिना जा सकता है। बधेली रीवा सतना शहडोल के अतिरिक्त ग्रि0 के अनुसार दमोह, जबलपुर, मांडला, बालाघाट तक फैली है अवधी की मरारी पोआली तथा परदेशी महाराष्ट्र भी बोलियाँ हैं। छत्तीसगढ़ी छत्तीसगढ़, रायपुर, रायगढ़ दुर्ग बिलासपुर, सरगुजा, बस्तर में (डॉ॰ उदयनारायण के अनुसार) काकेर, कबर्धा चाँदा उत्तर पूर्व में भी बोली जाती है। सरगुजिया सरगुजा में ग्रियर्सन के अनुसार कोरिया उदयपुर में भी, ग्वारो उपबोली असम में, तथा लरिया उड़िसा में बोली जाती है।
 
== आस्ट्रिक भाषा परिवार ==
[[आग्नेय भाषापरिवार|आस्ट्रिक भाषा परिवार]] की मॉन ख्मेर शाखा में सात तथा मुंडा शाखा में 58, कुल मिलाकर 65 मातृभाषाएँ जन0 में वर्णित हैं। खासी भाषा की जयंतिया तथा प्नार बोलियाँ खासी तथा जयंतिया पहाड़ियों में बोली जाती है। खेरवारी भाषा के अंतर्गत संथाली (झारखण्ड, बंगाल, बिहार उड़िसा की सीमाएँ), मुंडारी, हो, कुरुख, कोर्कू (कूर्कू) (सतपुड़ा पहाड़, महादेव पहाड़ियाँ), भूमिज (सिंहभूमि, मानभूमि), गदबा (मद्रास की उत्तरी पूर्वी पहाड़ियाँ) बोलियाँ गिनाई गई हैं। वस्तुत: इन्हें भाषाएँ कहना, जैसा जन0 में है, अधिक उपयुक्त होगा, क्योंकि बोधगम्यता के सिद्धांत के आधार पर उनमें अत्यधिक दूरी आ गई है। मुंडा शाखा की शेष बोलियाँ हैं - मकारी (महाराष्ट्र म0 प्र0), कोडा (कोरा) संबंधित मिरधा (पं0 बंगाल), बइरी, लोढ़ाजो खरिया से संबंधित हैं, (प0 बंगाल), निकोबारी (अंडमान निकोबार), तथा कोल भाषाएँ।
 
== इन्हें भी देखें ==