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:''लै दर्पण देखे श्रीमुख को, 'गोविंद' प्रभु चरननि सिर नावति॥
 
* [[छीतस्वामी]] (१४८१1515 ई. - १५८५ ई.)1585
*ई.)
:''धन्य श्री यमुने निधि देनहारी ।
:''करत गुणगान अज्ञान अध दूरि करि, जाय मिलवत पिय प्राणप्यारी ॥
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