"विक्रमोर्वशीयम्" के अवतरणों में अंतर

सम्पादन सारांश रहित
 
'''विक्रमोर्वशीयम्''' [[कालिदास]] का विख्यात नाटक।[[नाटक]]। यह पांच अंकों का नाटक है। इसमें राजा [[पुरुरवा]] तथा [[उर्वशी]] का प्रेम और उनके [[विवाह]] की कथा है।
 
==कथा==
[[चित्र:Urvashi-Pururavas by RRV.jpg|right|thumb|300px|ऊर्वशी और पुरुरवा ([[राजा रवि वर्मा]] द्वारा चित्रित)]]
एक बार देवलोक की परम सुन्दरी [[अप्सरा]] [[उर्वशी]] अपनी सखियों के साथ [[कुबेर]] के भवन से लौट रही थी। मार्ग में [[केशी]] दैत्य ने उन्हें देख लिया और तब उसे उसकी सखी चित्रलेखा सहित वह बीच रास्ते से ही पकड़ कर ले गया।