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तेनाली रामाकृष्णा ने हिन्दू धर्म पर रचनायें की हैं।
कहा जाता है कि वे मूल रूप से [[शैव]] थे और रामलिंग के नाम से जाने जाते थे पर बाद में उन्होंने [[वैष्णव सम्प्रदाय|वैष्णव]] धर्म अपना कर अपना नाम रामकृष्ण रख लिया। रामा की पत्नी [[शारधा]] और पुत्र [[भास्कर शर्मा]] था। रामा का परम मित्र [[गुंडप्पा]] था।
 
== राजा का दरबार ==
रामकृष्ण ने राजा कृष्णदेवराय के दरबार में एक महत्वपूर्ण पद संभाला। वह राजा द्वारा नियुक्त अष्टदिग्गजों में से एक था।
 
=== बाद के वर्षों में ===
1529 में राजा कृष्णदेवराय की मृत्यु के बाद, वह आगे भी कोर्ट में नहीं रहे और अपनी जन्मभूमि तेनाली वापस आ गए। 30 साल बाद, एक विशाल सर्पदंश से उनकी मृत्यु हो गई। अभिलेखों में यह भी कहा गया है कि रामकृष्ण कई बार राजा कृष्णदेवराय की रक्षा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे, जो गंभीर परिस्थितियों में उनके बचाव में आए थे और वे उनके सबसे अच्छे दोस्त थे।
 
 
== साहित्यिक कार्य ==
तेनाली राम को उनकी प्रतिभा और बुद्धिमत्ता के लिए जाना जाता था। तेनाली रामकृष्ण की महान कृति पांडुरंगा महात्म्य उच्च योग्यता का एक काव्य है, जो अपने वाक्यांशों की संक्षिप्त गरिमा के लिए उल्लेखनीय है, और इसे तेलुगु साहित्य के पञ्च महाविद्याओं (पाँच महान काव्य) में गिना जाता है। इसमें पांडुरंग के रूप में विष्णु के एक तीर्थस्थल का पौराणिक वृत्तांत शामिल है, पंढरपुर में संत पांडविका के मंत्रिपद से अभिषेक किया जाता है। निगामा शर्मा नाम के एक ब्राह्मण, जिन्होंने अपव्यय और कुशासन में अपना जीवन बर्बाद किया, ने पंढरपुर में अंतिम सांस ली। यम के सेवकों और विष्णु के सेवकों के बीच विवाद सुनिश्चित करता है। पूर्व उसे एक नरक में ले जाने के लिए उत्सुक थे क्योंकि वह एक दुष्ट जीवन जीता था और बाद में उसे स्वर्ग के लिए दावा किया था, क्योंकि वह उस पवित्र स्थान पर मर गया था। दरअसल, फैसला विष्णु तेनाली के सेवकों के पक्ष में है और स्कंद पुराण से पांडुरंगा महात्म्यम के लिए विषय लिया और पांडुरंगा के भक्तों के बारे में कई कहानियों के साथ इसे बढ़ाया। तेनाली रामकृष्ण द्वारा 'निगमा सरमा अक्का' नाम का एक काल्पनिक चरित्र बनाया गया था और उन्होंने उसे नाम दिए बिना उसके चारों ओर एक कहानी का निर्माण किया। उन्होंने चातुवु’ नामक कई एक्सपेम्पोर कविताओं की भी रचना की।
 
तेनाली रामकृष्ण को लोक नायक का दर्जा तब मिला जब वे कृष्णदेवराय के दरबारी कवि थे, लेकिन साथ ही उन्होंने धर्म पर गंभीर रचनाएँ कीं। उनकी तीन कथाएँ आज भी उपलब्ध हैं। उनकी पहली कविता, शंभू शिक्षक उदभट के बारे में उदितारथ्य चरितामू है जो पलकुरीकी सोमनाथ के बसवा पुराणम पर आधारित है। उदितधर्या चरितमु वाराणसी की पवित्रता से संबंधित है। तेनाली रामकृष्ण के शैव धर्म के प्रति आत्मीयता के कारण, उन्हें तेनाली रामालिंग कवि के रूप में भी जाना जाता था। हालाँकि, वैष्णव धर्म के प्रति उनकी बहुत श्रद्धा थी, जो उनके काम पांडुरंगा महात्म्य में परिलक्षित होती है।
 
तेनाली राम को एक विकट कवि (तेलुगु लिपि में एक विलोमपद) कहा जाता था, जिसका अर्थ है जोकर-कवि। वह अपने कार्यों के लिए "कुमार भारती" के भी हकदार थे।
 
==लोकप्रिय कथाओं में ==
== सन्दर्भ ==
<references group="https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=%E0%A4%A4%E0%A5%87%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%80_%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%BE&action=edit&section=4" />[https://web.archive.org/web/20190802151601/https://www.moral-stories.xyz/2019/07/tenali-raman-stories-in-hindi.html तेनाली राम की कहानियाँ] {{टिप्पणीसूची}}
 
== बाहरी कड़ियाँ ==
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[[Category:कवि]]
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