"अष्टांग योग": अवतरणों में अंतर

404 बाइट्स जोड़े गए ,  1 वर्ष पहले
→‎नियम: पातंजलयोगदर्शन अनुसार प्राणायाम संबंधी सूत्र
(→‎नियम: पतंजलयोगदर्शन के अनुसार नियम संबंधित सूत्र)
(→‎नियम: पातंजलयोगदर्शन अनुसार प्राणायाम संबंधी सूत्र)
 
=== आसन ===
:[[आसन|योगासनों]] द्वारा शरीरिक नियंत्रण
:आसन शरीर को साधने का तरीका है।
पतंजलि ने स्थिर तथा सुखपूर्वक बैठने की क्रिया को आसन कहा है (''स्थिरसुखमासनम् ॥४६॥'')।<ref>[https://archive.org/stream/yogaphilosophyb00tatygoog#page/n6/mode/2up The Yoga Philosophy] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20160324170352/https://archive.org/stream/yogaphilosophyb00tatygoog#page/n6/mode/2up |date=24 मार्च 2016 }} TR Tatya (Translator), with Bhojaraja commentary; Harvard University Archives; [https://archive.org/stream/yogadaranasutra00patagoog#page/n4/mode/2up The Yoga-darsana: The sutras of Patanjali with the Bhasya of Vyasa ] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20160316054457/https://archive.org/stream/yogadaranasutra00patagoog#page/n4/mode/2up |date=16 मार्च 2016 }}GN Jha (Translator), with notes; Harvard University Archives; The Yogasutras of Patanjali Charles Johnston (Translator)</ref> पतंजलि के [[योगसूत्र]] में ने आसनों के नाम नहीं गिनाए हैं। लेकिन परवर्ती विचारकों ने अनेक आसनों की कल्पना की है। वास्तव में आसन [[हठयोग]] का एक मुख्य विषय ही है। इनसे सम्बंधित ‘[[हठयोगप्रदीपिका]]’ ‘[[घेरण्ड संहिता]]’ तथा ‘[[योगशिखोपनिषत्‌|योगाशिखोपनिषद]]’ में विस्तार से वर्णन मिलता है।
=== प्राणायाम ===
{{मुख्य|प्राणायाम}}
 
'''तस्मिन् सति श्वासप्रश्वासयोर्गतिविच्छेद: प्राणायाम: ।। पातंजलयोगदर्शन 2/49 ।।'''
 
उस ( आसन) के सिद्ध होने पर श्वास और प्रश्वास की गति को रोकना प्राणायाम है ।
 
योग की यथेष्ट भूमिका के लिए नाड़ी साधन और उनके जागरण के लिए किया जाने वाला श्वास और प्रश्वास का नियमन प्राणायाम है। प्राणायाम मन की चंचलता और विक्षुब्धता पर विजय प्राप्त करने के लिए बहुत सहायक है।
8

सम्पादन