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[[चित्र:"Capture of the King of Delhi by Captain Hodson".jpg|thumb|left|कैप्टन हडसन के द्वारा दिल्ली के राजा को बंदी बनाया जाना]]
 
1857 ई0 क्रान्ति मे दिल्ली के आसपास के गुर्जरक्रांतिकारी अपनी ऐतिहासिक परम्परा के अनुसार विदेशी हकूमत से टकराने के लिये उतावले हो गये थे । दिल्ली के चारों ओर बसे हुए तंवर, चपराने, कसाने, बैंसले, विधुड़ी, अवाने खारी, बासटटे, लोहमोड़, बैसाख तथा डेढ़िये वंशों के गुर्जर संगठित होकर अंग्रेंजी हकूमत को भारत से खदेड़ने और दिल्ली के मुगल बादशाह [[बहादुरशाह जफर]] को पुनः भारत का सम्राट बनाने के लिए प्राणपण से जुट गये थे <ref>विघ्नेष त्यागी, मेरठ के ऐतिहासिक क्रान्ति स्थल और घटनाएं (लेख), दैनिक जागरण, मेरठ, दिनांक 5 मई 2007</ref> गुर्जरोक्रांतिकारी ने शेरशाहपुरी मार्ग मथुरा रोड़ यमुना नदी के दोनों किनारों के साथ-साथ अधिकार करके अंग्रेंजी सरकार के डाक, तार तथा संचार साधन काट कर कुछ समय के लिए दिल्ली अंग्रेंजी राज समाप्त कर दिया था। दिल्ली के गुर्जरोंक्रांतिकारी ने मालगुजारी बहादुरशाह जफर मुगल बादशाह को देनी शुरू कर दी थी। <ref>शिव कुमार गोयल, ऐसे शुरू हुई मेरठ में क्रान्ति (लेख)दैनिक प्रभात, मेरठ, दिनांक 10 मई 2007।</ref>
दयाराम गुर्जर के नेतृत्व में गुर्जरों ने दिल्ली के मेटकाफ हाउस को कब्जे में ले लिया । जो अंग्रेंजों का निवास स्थान था, यहां पर सैनिक व सिविलियम उच्च अधिकारी अपने परिवारों सहित रहा करते थे । जैसे ही क्रान्ति की लहर मेरठ से दिल्ली पहुंची, दिल्ली के गुर्जरों में भी वह जंगल की आग की तरफ फैल गई । दिल्ली के मेटकाफ हाउस में जो अंग्रेंज बच्चे और महिलायें उनको जीवनदान देकर गुर्जरों ने अपनी उच्च परम्परा का परिचय दिया था। महिलाओं और बच्चों को मारना पाप समझ कर उन्होने जीवित छोड़ दिया था और मेटकाफ हाउस पर अधिकार कर लिया ।दयाराम गुर्जर के नेतृत्व में दिल्ली के समीप [[वजीराबाद]] जो अंग्रेंजों का गोला बारूद का जखीरा था उस पर अधिकार करके बहादुरशाह जफर के हवाले कर दिया जिसमें एक लाख रू0 की बन्दूके थी। इसी तरह अंग्रेंजी सेना की 16 गाड़ियां 7 जून 1857 को रास्ते में जाती हुई रोक कर उनको अपने कब्जे में लेकर मुगल सम्राट बहादुरशाह जफर को लाल किले में जा कर भेंट कर दी थी।
<ref>एरिक स्ट्रोक, पीजेन्ट आम्र्ड</ref>
विलियम म्योर के इन्टेलिजेन्स रिकार्ड के अनुसार, गुर्जरों ने अंग्रेंजों के अलावा उन लोगों को भी नुकसान पहुंचाया जो अंग्रेजों का साथ दे रहे थे। 1857 की क्रान्ति के दमन चक्र के दौरान चन्द्रावल गांव को जला कर खाक कर दिया गया था सभी स्त्री पुरूषों को बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया गया था। क्रान्तिकारियो पर मेटकाफ हाउस और वजीराबाद के शस्त्रागार को लूटने का गंभीर आरोप था । अंग्रेजों को मारने का तो आरोप था ही। <ref>Intelligence Record of William myor</ref>
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