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सम्पादन सारांश रहित
 
 
ए हसीनाओं , इतना भी गुरूर न कीजिए।
{{साँचा:सहायता|realName=|name=Pratap Sahab}}
आशिक हूं मैं, दिल ए करीब तो आने दीजिए।
मंजूर ए मुहब्बत, खुदा ऐ गवा, प्यार को प्यार से अपना तो लीजिए।
दिल ऐ आशिकी मेरी दिलरुबा, आ गए आगोश, जफा कीजिए।
 
 
-- [[सदस्य:नया सदस्य सन्देश|नया सदस्य सन्देश]] ([[सदस्य वार्ता:नया सदस्य सन्देश|वार्ता]]) 06:45, 26 मई 2021 (UTC)
___Singh Sahab
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