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'''कोविड-19 महामारी में म्यूकोर्मिकोसिसअन्य संक्रमण''' मुख्य रूप से कोविड-19 से ठीक होने वाले मरीजों में देखने को मिल रही है। नाक,इन आंखसंक्रमणों औरमें दिमागम्यूकोर्मिकोसिस केऔर आसपासकैंडिडा इससे फंगसहोने वाले संक्रमण केभी मामलेशामिल देखनेहैं। कोइन मिलेसंक्रमणों हैं।का यहसीधे संक्रमणतौर लोगोंपर कोविड-19 से लोगोंलेना कोदेना नहीं होताहै। है,लेकिन अर्थातवायरस यहसे कोरोनालड़ने कीके तरहबाद फैलनेऔर वाली बीमारी[[स्टेरॉयड]] नहींके है।अधिक लेकिनइस्तेमाल येसे देखनेशरीर कोका मिलाइम्यून हैसिस्टम किकाफी यहकमज़ोर कोरोनाहो सेजाता ठीकहै होनेऔर वालेआसपास मरीजों,की जिसमेंसंक्रमण खासफैलाने करवाले [[मधुमेह]]बीमारियों सेको ग्रस्तअपना लोगोंसंक्रामण मेंफैलाने सबसेका अधिकमौका देखने कोदे मिलादेता है।
 
इस महामारी के दौरान भी ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिसमें लोग ऐसे संक्रमण से भी ग्रसित हो रहे हैं, जिसमें केवल कुछ कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग ही संक्रमित हो रहे थे। यह संक्रमण लोगों से लोगों को नहीं होता है, अर्थात यह कोरोना की तरह फैलने वाली बीमारी नहीं है। लेकिन ये देखने को मिला है कि यह कोरोना से ठीक होने वाले मरीजों, जिसमें खास कर [[मधुमेह]] से ग्रस्त लोगों में सबसे अधिक देखने को मिला है।
 
==मामले==
===म्यूकोर्मिकोसिस===
म्यूकोर्मिकोसिस एक तरह का फंगल संक्रमण है, जो हमेशा से ही मानव के आसपास सड़े गले फल-सब्जियों या [[खाद]] में पाया जाता है। यह आमतौर पर मनुष्यों को संक्रमित नहीं करता है। यदि इससे कोई मनुष्य संक्रमित भी हो जाता है तो इम्यून सिस्टम उसे संक्रमण फैलाने से पूर्व ही नष्ट कर देता है। हालांकि कोविड-19 महामारी में ये देखने को मिला कि कई लोग जो ठीक हो रहे हैं, वे इस संक्रमण का शिकार हो रहे हैं। ऐसे मामलों में सबसे अधिक मामले [[मधुमेह]] रोगियों के सामने आए हैं। इसके अलावा कोविड के इलाज में [[स्टेरॉयड]] का जरूरत से ज्यादा उपयोग को भी एक कारण माना गया है, जिसके कारण इम्यून सिस्टम काफी कमजोर हो जाता है और इस काबिल नहीं होता कि वो किसी नए संक्रमण को नष्ट कर सके।
 
पहले कुछ म्यूकोर्मिकोसिस के मामलों में काला फफूंद देखने को मिला था। हालांकि इसके बाद सफ़ेद रंग के फफूंद का मामला भी सामने आ गया और इसी के साथ साथ कई मरीजों को दोनों तरह के फफूंद से ग्रस्त होने का भी मामला सामने आ चुका है। नए मामले में [[अजमेर]] के एक 40 वर्षीय शिक्षक को कोविड के इलाज से छुट्टी मिलने के बाद काला फंगस के लक्षण दिखने लगे, जिसके पश्चात उन्हें जांच के लिए अस्पताल लाया गया था। जांच में पता चला कि वे काला और सफ़ेद, दोनों तरह से फफूंद से संक्रमित हैं। डॉक्टरों के अनुसार यह इस तरह का पहला मामला है, जिसमें दोनों तरह के फंगल संक्रमण से कोई ग्रसित हुआ हो।<ref>{{cite news |last1=कुशेन्द्र |first1=तिवारी |title=अजमेर में आया अनोखा मामला, कोरोना फ्री हुए मरीज को हुआ ब्लैक और वाइट फंगस एक साथ , डॉक्टर हैरान |url=https://navbharattimes.indiatimes.com/state/rajasthan/ajmer/ajmer-unique-case-black-and-white-fungus-occurred-to-corona-free-patient-doctor-surprised/articleshow/82970644.cms |accessdate=26 मई 2021 |publisher=नवभारत टाइम्स}}</ref>
==इतिहास==
 
===कैंडिडा===
 
==मामले==
पहले कुछ म्यूकोर्मिकोसिस के मामलों में काला फफूंद देखने को मिला था। हालांकि इसके बाद सफ़ेद रंग के फफूंद का मामला भी सामने आ गया और इसी के साथ साथ कई मरीजों को दोनों तरह के फफूंद से ग्रस्त होने का भी मामला सामने आ चुका है। नए मामले में [[अजमेर]] के एक 40 वर्षीय शिक्षक को कोविड के इलाज से छुट्टी मिलने के बाद काला फंगस के लक्षण दिखने लगे, जिसके पश्चात उन्हें जांच के लिए अस्पताल लाया गया था। जांच में पता चला कि वे काला और सफ़ेद, दोनों तरह से फफूंद से संक्रमित हैं। डॉक्टरों के अनुसार यह इस तरह का पहला मामला है, जिसमें दोनों तरह के फंगल संक्रमण से कोई ग्रसित हुआ हो।<ref>{{cite news |last1=कुशेन्द्र |first1=तिवारी |title=अजमेर में आया अनोखा मामला, कोरोना फ्री हुए मरीज को हुआ ब्लैक और वाइट फंगस एक साथ , डॉक्टर हैरान |url=https://navbharattimes.indiatimes.com/state/rajasthan/ajmer/ajmer-unique-case-black-and-white-fungus-occurred-to-corona-free-patient-doctor-surprised/articleshow/82970644.cms |accessdate=26 मई 2021 |publisher=नवभारत टाइम्स}}</ref>