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नाकर गुजराती भाषा के मध्यकालीन कवि थे जिन्होंने रामायण और महाभारत दोनों का गुजराती मे भाषांतर कीया था।
 
== रामायण की प्रति<ref>https://archive.org/details/in.ernet.dli.2015.305156</ref> ==
नाकर की रामायण की प्रति '''डाहीलक्ष्मी पुस्तकालय, नडियाद''' मे है। इस प्रति मे ७ काण्ड हैं और प्रति क समय संवत १६२४ का हैं। इसके आरंभ के और अंत के पृष्ठ फटे हुए हैं। यह रामायण गुजराती 'कडवु' मे विभाजित हैं।
 
== नाकर की रामायण कथा<ref>https://archive.org/details/in.ernet.dli.2015.305156</ref> ==
'''बालकाण्ड'''
* नाकर की रामायण की फटी हुए प्रति कडवुं ४ से प्रारंभ होती हैं जहाँ मोहिनी की कथा है।
* इसमें केवल सीता का भूमिप्रवेश और राम के स्वर्गगमन की कथा नहीं हैं।
 
== नाकर का महाभारत<ref>https://archive.org/details/in.ernet.dli.2015.305156</ref> ==
'''आदिपर्व'''
नाकर का आदिपर्व '''सेन्ट्रल लाइब्रेरी, वडोदरा''' है जिसमें २६ कडवे हैं पर यह अधूरी हैं।
* इसका प्रारंभ जनमेजय के अश्वमेध और सरमा के शाप से होता है।
* धौम्य के तीन शिष्यों की कथा।
* आस्तिक की कथा
* विनीता और गरुड़ का आख्यान
* ३४ से ३६ - युधिष्ठिर का उपदेश
* ३७ से ४३ - व्यास का आगमन और अर्जुन को सूचन देना, अर्जुन की तपश्चर्या और शिव से मिलना
* ४४ और ४५ - अर्जुन का स्वर्ग जाना
* ४६ और ४७ - धृतराष्ट्र का विषाद
* ४८ से ५० - नल की कथा
नाकर का भीष्मपर्व '''गुजरात विद्यासभा''' मे हैं जिसके ४३ कडवे हैं।
* प्रथम ३० कडवो मे संजय द्वारा सेना की संख्या, राजाओं के नाम, अर्जुन का विषाद, भगवद्गीता और दो दिनों के युद्ध का वर्णन हैं और इसका अंत भीष्म की शरशैया से होता हैं।
* नाकर के भीष्मपर्व की प्रति अति जीर्ण हैं और कुछ पृष्ठ भी नहीं हैं।
'''शल्यपर्व'''
नाकर के शल्यपर्व के १० कडवे हैं।
नाकर की महाभारत के स्त्रीपर्व के ९ कडवे है और उसके आगे से अधूरा हैं।
* इसमें धृतराष्ट्र द्वारा भीम की मूर्ति भंग करना, गांधारी का विलाप और शाप एवं कुंती द्वारा कर्णजन्म का रहस्य कहने की कथा हैं।
== सन्दर्भ ==
2,773

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