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===पूर्ण रूप से पतन===
परमर्दीपरमर्दीदेव (शासनकाल 1165-1203 ईस्वी) ने छोटी उम्र में चंदेला सिंहासन पर आरूढ़ हुआ। हालांकि उसके शासनकाल के शुरुआती वर्ष शांतिपूर्ण थे, 1182-1183 ईस्वी के आसपास, चाहमाना शासक पृथ्वीराज चौहान ने चंदेला साम्राज्य पर आक्रमण किया। मध्ययुगीन पौराणिक गाथागीतों के अनुसार, पृथ्वीराज की सेना ने तुर्क बलों द्वारा एक आश्चर्यजनक हमले के बाद अपना रास्ता खो दिया और अनजाने में चंदेला की राजधानी महोबा में डेरा डाल दिया। इससे पृथ्वीराज के दिल्ली के लिए रवाना होने से पहले चंदेलों और चौहानों के बीच थोड़ा संघर्ष हुआ ।हुआ। कुछ समय बाद, पृथ्वीराज ने चंदेला साम्राज्य पर आक्रमण किया और महोबा को युद्ध में हरा दिया। परमर्दिमहोबा पर पृथ्वीराज का अधिकार हो गया। कायरपरमर्दिदेव ने कलंजाराकालिंजर किले में शरण ली। इस लड़ाई में आल्हा, ऊदल और अन्य सेनापतियों के नेतृत्व में चंदेला बल हार गया। विभिन्न गाथा के अनुसार, परमर्दी ने या तो शर्म से आत्महत्या कर ली या गया भाग गया।
 
पृथ्वीराज चौहान की महोबा की छापेमारी उनके मदनपुर के शिलालेखों में अंकित है। हालांकि,भाटों की किंवदंतियों में ऐतिहासिक अशुद्धियों के कई उदाहरण हैं। उदाहरण के लिए, यह ज्ञात है कि परमारी चौहान की जीत के तुरंत बाद सेवानिवृत्त नहीं हुआ या मृत्यु नही हुयी थे। उसने चंदेला सत्ता को फिर बहाल किया, और लगभग 1202-1203 CE तक एक प्रभुता के रूप में शासन किया, जब दिल्ली के घुरिड राज्यपाल ने चंदेला साम्राज्य पर आक्रमण किया। दिल्ली सल्तनत के एक इतिहासकार, ताज-उल-मासीर के अनुसार, परमर्दीपरमर्दिदेव ने दिल्ली की सेनाओं के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। उसने सुल्तान को उपहार देने का वादा किया, लेकिन इस वादे को निभाने से पहले ही उसकी मृत्यु हो गई। उनके दीवान ने हमलावर ताकतों के लिए कुछ प्रतिरोध किया, लेकिन अंत में उसे अधीन कर लिया गया। 16 वीं शताब्दी के इतिहासकार फरिश्ता का कहना है कि परमर्दीपरमर्दीदेव की हत्या उसके ही मंत्री ने की थी, जो दिल्ली की सेनाओं के सामने आत्मसमर्पण करने के राजा के फैसले से असहमत था ।
 
चंदेला सत्ता दिल्ली की सेना के खिलाफ अपनी हार से पूरी तरह उबर नहीं पाई थी। त्रिलोकीवर्मन, वीरवर्मन और भोजवर्मन द्वारा परमर्दी को उत्तराधिकारी बनाया गया। अगले शासक हम्मीरवर्मन (1288-1311 CE) ने शाही उपाधि महाराजाधिराज का उपयोग नहीं किया, जो बताता है कि चंदेला राजा की उस समय तक निम्न दर्ज़े की स्थिति थी। बढ़ते मुस्लिम प्रभाव के साथ-साथ अन्य स्थानीय राजवंशों, जैसे बुंदेलों, बघेलों और खंजरों के उदय के कारण चंदेला शक्ति में गिरावट जारी रही।
 
हम्मीरवर्मन के वीरवर्मन द्वितीय सिंहासन पर आरूढ़ हुआ, जिसके शीर्षक उच्च राजनीतिक दर्ज़े की स्थिति का संकेत नहीं देते हैं। परिवार की एक छोटी शाखा ने कलंजाराकालिंजर पर शासन जारी रखा । इसके शासक को 1545 ईस्वी में शेरशाह सूरी की सेना ने मार डाला। महोबा में एक और छोटी शाखा ने शासन किया, दुर्गावती, इसकी एक राजकुमारी ने मंडला के गोंड शाही परिवार में शादी की।
 
== संस्कृति एवं कला ==
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