अरुण द्विवेदी अनन्त

अरुण द्विवेदी अनन्त 29 अक्टूबर 2020 से सदस्य हैं
खाली किया गया / कृपया सदस्य पृष्ठ नीति देखें
छो (संरक्षित कृषि प्रस्तावना विश्व में भूमि क्षरण एक गंभीर पर्यावरणीय समस्या है जो कि हमारे पारिस्थितिकी तंत्र एवं खाद्य सुरक्षा के लिए एक खतरा है। भूमि क्षरण से मृदा का कटाव, पोषक तत्वों का दोहन, मृदा में कार्बनिक पदार्थों की कमी, मिट्टी की उत्पादन शक्ति में कमी, जैव विविधता में कमी, अनियमित भूजल स्तर, जलवायु परिवर्तन एवं आर्थिक नुकसान प्रमुख रुप से होता है। भारत में सभी प्रकार की जलवायु जैसे शीतोष्ण, सम शीतोष्ण, कटिबंधीय, उष्ण कटिबंधीय इत्यादि पर खेती की जाती है। विश्व की जनसंख्या बढ़ने के साथ-स)
टैग: मोबाइल संपादन मोबाइल वेब सम्पादन यथादृश्य संपादिका उन्नत मोबाइल सम्पादन Reverted
(खाली किया गया / कृपया सदस्य पृष्ठ नीति देखें)
टैग: रिक्त Manual revert
'''<u>[[संरक्षित]] [[कृषि]]</u>'''
 
'''<u>प्रस्तावना</u>'''
 
'''विश्व में भूमि क्षरण एक गंभीर पर्यावरणीय समस्या है जो कि हमारे पारिस्थितिकी तंत्र एवं खाद्य सुरक्षा के लिए एक खतरा है। भूमि क्षरण से मृदा का कटाव, पोषक तत्वों का दोहन, मृदा में कार्बनिक पदार्थों की कमी, मिट्टी की उत्पादन शक्ति में कमी, जैव विविधता में कमी, अनियमित भूजल स्तर, जलवायु परिवर्तन एवं आर्थिक नुकसान प्रमुख रुप से होता है। भारत में सभी प्रकार की जलवायु जैसे शीतोष्ण, सम शीतोष्ण, कटिबंधीय, उष्ण कटिबंधीय इत्यादि पर खेती की जाती है। विश्व की जनसंख्या बढ़ने के साथ-साथ भूमि क्षरण की समस्याएँ भी बढ़ती रहेंगी जिसकी वजह से उपजाऊ मृदा एवं अनाज के लिए विभिन्न देशों के बीच खाद्य सुरक्षा के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। इन समस्याओं से निपटने के लिये विश्व में भूमि क्षरण को रोकने तथा प्राकृतिक संसाधनों का इष्टत्म उपयोग एवं तरीकों पर पिछले कई वर्षों से विकल्पों की तलाश जारी है। भूमि संसाधन का उपयोग एवं प्रबन्धन की विधियों पर मृदा की उत्पादन क्षमता निर्भर करती है। मृदा में कार्बनिक पदार्थों का प्रबन्धन अति महत्वपूर्ण है क्योंकि यह मृदा संरचना के स्थिरिकरण के लिए आवश्यक है। सघन कृषि के अन्तर्गत खेतों की लम्बे समय तक जुताई करने से अधोसतह में एक मजबूत परत (क्रस्ट) बन जाती है जिससे मृदा संरचना पर गहरा प्रभाव पड़ता है।'''
 
'''वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन की वजह से असमय वर्षा, अनियमित वर्षा जल का वितरण, मार्च महीने में तापमान का एकाएक से बढ़ना (टर्मिनल हीट), औलावृष्टि, अतिवृष्टि, कीट व बीमारियों का प्रकोप इत्यादि जैसी कई गंभीर समस्याएं पूरे विश्व के सामने बाँहें फैलाये खड़ी हैं। भारत के अधिकांश हिस्सों में भू-जलस्तर वर्ष दर वर्ष नीचे जाता जा रहा है जो कि एक चिंता का विषय बना हुआ है फिर भी भू-जल का दोहन ज्यों का त्यों बना हुआ है।'''
 
'''अतः संरक्षित खेती आधुनिक तकनीक की व संरचना है जिसमें एक नियंत्रित वातावरण में फसलों की खेती की जाती है। इसमें कीट अवरोधी नेट हाउस, ग्रीन हाउस, नवीनतम तकनीक से लैस पालीहाउस, प्लास्टिक लो टनल, प्लास्टिक हाई टनल, प्लास्टिक मल्चिंग और ड्रिप सिंचाई का इस्तेमाल किया जाता है।'''
 
'''इसमें सब्जियों में शिमला मिर्च, बैंगन, गोभी, खीरा, टमाटर, मिर्च, तथा फलों में नींबू की प्रजाति एवं सजावटी फसलों में जरबेरा, ग्लेडियोलस, लिली व गुलाब की फसलों को आसानी से संरक्षित तकनीकी द्वारा उगाया जा सकता है।'''
 
'''<u>परिभाषा</u>'''
 
'''"जैविक व अजैविक कारकों से बचाते हुए जब हम किसी फसल का उत्पादन सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित तरीके से करते हैं उसे 'संरक्षित खेती (कृषि)' कहते हैं।"'''
 
'''"संरक्षित कृषि वह तकनीकी है जिसमें पौधों के आसपास सूक्ष्म वातावरण तैयार कर पौधों के वृद्धिकाल में आवश्यकता के अनुरूप संरक्षित किया जाता है"'''
 
'''<u>आवश्यकता</u>'''
 
'''हमारे देश में सब्जियों की कम उत्पादकता एवं निम्न गुणवत्ता का मुख्य कारण खेती का लगभग शत प्रतिशत खुले वातावरण में किया जाना है। तथा दूसरा कृषकों द्वारा सब्जी उत्पादन में अभी भी परंपरागत विधियों तथा तकनीकों का अपनाया जाना है। खुले वातावरण में अनेकों प्रकार के जैविक - अजैविक कारकों द्वारा सब्जी तथा अन्य फसलों को भारी नुकसान पहुंचता है। जिसके कारण फसलों की उत्पादकता एवं गुणवत्ता पर दुष्प्रभाव पड़ता है। इसीलिए कृषि में नई तकनीकी का इस्तेमाल करना, जिससे उत्पादन पर कोई असर न पड़े और शुद्ध एवं संतोषजनक उत्पादन प्राप्त होता रहे।'''
 
'''संरक्षित खेती नए युग की नवीनतम कृषि प्रणाली है। जिसमें फसलों की मांग के अनुसार वातावरण को नियंत्रित करते हुए महंगी फसलों के लिए वातानुकूलित माहौल स्थापित किया जाता है।'''
 
'''<u>इतिहास</u>'''
 
'''प्राचीन समय में जब खेती की विकास गाथा में पानी के ज्यादा इस्तेमाल, उर्वरक और ऊर्जा का अधिक इस्तेमाल करने वाली तकनीकों की अहम भूमिका हुआ करती थी। लेकिन अब वक्त बदल रहा है। आज कृषि के विकास के साथ-साथ इस बात का भी खास ख्याल रखा जा रहा है कि इनका इस्तेमाल कम से कम हो, ताकि लागत कम होने के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरण की सेहत पर भी इसका बुरा असर न हो।'''
 
'''इस नई खेती की शुरुआत 2000 के आसपास हुई थी।'''
 
'''<u>वर्तमान स्थिति</u>'''
 
'''वर्तमान में वैश्विक स्तर पर, संरक्षित खेती लगभग 125 मिलियन हेक्टेयर में की जाती है. संरक्षित खेती को बढ़ावा देने वालों देशों में अमेरिका, ब्राजील, अर्जेंटीना, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया अग्रणी देश हैं।'''
 
'''भारत में, संरक्षित खेती अभी भी शुरुआती चरणों में है। पिछले कुछ वर्षों में, जीरो जुताई और संरक्षित खेती को अपनाने से लगभग 1.5 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र का विस्तार हुआ है। गंगा-सिन्धु के मैदानी इलाकों में चावल-गेहूँ कृषि प्रणाली में गेहूँ में संरक्षण आधारित कृषि को अपनाया जा रहा है. भारत में, राज्य कृषि विश्वविद्यालयों और आईसीएआर संस्थानों संयुक्त प्रयासों से संरक्षित खेती के विकास और प्रसार करने का प्रयास किया जा रहा है।'''
 
'''<u>संरक्षित खेती की परिकल्पना</u>'''
 
'''भारत में, संरक्षित खेती प्रौद्योगिकी वाणिज्यिक उत्पादन के लिए लगभग तीन दशक ही पुरानी है, जबकि विकसित देशों जैसे जापान, रुस, ब्रिटेन, चीन, हॉलैंड और अन्य देशों में दो सदी पुरानी है। इजराइल एक ऐसा देश है जहां किसानों ने अच्छी गुणवत्ता वाले फल, फूल और सब्जियों को कम पानी वाले रेगिस्तानी क्षेत्रों में उगाकर इस तकनीक से अच्छे उत्पादन के साथ बढ़िया मुनाफा भी कमा रहे हैं। हॉलैंड ने पॉलीहाउस की उन्नत तकनीक विकसित करके दुनिया के फूल निर्यात जगत में 70 प्रतिशत का योगदान दिया है।'''
 
'''संरक्षित खेती नवीनतम् तकनीक की वह संरचना है, जिसमें एक नियंत्रित वातावरण के अंर्तगत मूल्यवान फसलों की खेती की जाती है। ये संरक्षित संरचनाएं कीट अवरोधी नेट हाउस, ग्रीन हाउस, नवीनतम् तकनीक से लैस पॉलीहाउस, प्लास्टिक लो-टनल, प्लास्टिक हाई-टनल, प्लास्टिक मल्चिंग और ड्रिप सिंचाई तकनीक आदि प्रकार की होती हैं।'''
 
'''विश्व में सब्जियों के कुल उत्पादन में भारत का चीन के बाद दूसरा स्थान है। सब्जियों की प्रति व्यक्ति उपलब्धता आवश्यकता से कम है। हरित क्रांति के बाद बढ़ती खाद्य और पोषण सम्बन्धी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उत्पादन की मात्रा के साथ-साथ कृषि उत्पाद की गुणवत्ता पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है।'''
 
'''भारत में बढ़ती हुई जनसंख्या एवं खाद्य संबंधित मांग को पूरा करने के लिए सब्जियों के फसलोत्पादन में वृद्धि करने की अत्यन्त आवश्यकता है।'''
 
'''<u>उद्देश्य</u>'''
 
'''संरक्षित कृषि के माध्यम से फसलों की मांग के अनुसार सूक्ष्म वातावरण को नियन्त्रित करते हुए मूल्यवान सब्जियों की खेती का प्राकृतिक प्रकोपों एवं अन्य समस्याओं से बचाव किया जाता है, और कम से कम क्षेत्रफल में अधिक से अधिक गुणवत्ता युक्त उत्पादन प्राप्त किया जाता है।'''
 
'''वर्तमान परिस्थितियों में परिनगरीय एवं शहरी क्षेत्रों के लघु एवं सीमान्त किसानों हेतु रोजगारपरक तकनीकी साबित हो रही है।'''
 
'''संसाधन संरक्षण तकनीकियों से फसलों में उच्चतम् परिणाम तभी आते हैं जब सिंचाई जल उत्पादकता, उर्वरक उपयोग दक्षता एवं फसल पकाव में सुधार होता है व खरपतवार दबाव कम होता है। विभिन्न क्षेत्रों में इस तकनीकी का प्रसारण तेजी से हो रहा है।'''
 
'''संरक्षण खेती खाद्य सुरक्षा के लिए भविष्य की योजना–क्लाईमेट स्मार्ट खेती प्राकृतिक प्रक्रियाओं में परिवर्तन के कारण जलवायु में लगातार परिवर्तन हो रहा है जो एक चिंता का विषय बना हुआ है। संरक्षण खेती की तकनीकियों को अपनाते हुये हमें ऐसी खेती की आवश्यकता होगी जो समय के साथ चलते हुये सभी प्राकृतिक एवं अप्राकृतिक संसाधनों का उचित उपयोग करते हुये टिकाऊ उत्पादन देने में सक्षम हो। ऐसे समय में हमारे सामने क्लाईमेट स्मार्ट खेती का नाम उभरकर सामने आता है। इस विषय पर अध्ययनरत् वैज्ञानिकों का मानना है कि मानवीय गतिविधियों के कारण जलवायु परिवर्तन की वर्तमान दर पिछले 10,000 साल के किसी भी समय की तुलना में तेजी से हुई है। मानवीय गतिविधियों की वजह से उत्सर्जन के नए स्रोतों ने वृद्धि एवं जंगलों के आकार को भी निरंतर प्रभावित किया है। हरितगृह (ग्रीन हाउस) गैसों के उत्सर्जन में मानव जनितक्रियाओं द्वारा वर्ष 1970 से 2004 के बीच 70 प्रतिशत से भी अधिक वृद्धि हुई है और अनुमान है कि 25 से 95 प्रतिशत तक की वृद्धि वर्ष 2030 तक हो सकती है। जलवायु परितर्वन पर अंतर सरकारी पैनल (आईपीसीसी) ने अपनी चौथी आंकलन रिपोर्ट में कहा है कि जलवायु परिवर्तन 1990 के बाद तेजी से बढ़ा है इसके लिए मानवीय गतिविधियों को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है जिसका पारिस्थितिकी प्रणालियों पर प्रभाव पड़ेगा। जीवाश्म ईंधन के दोहन और कृषि पद्धतियों से 20वीं सदी के दौरान वैश्विक तापमान में औसतन वृद्धि क्रमशः 0.6 डिग्री सेल्सियस एवं 0.17 डिग्री सेल्सियस हुई है।'''
 
'''कृषि फसलें उगाने से वायुमण्डलीय कार्बन का स्थिरीकरण किया जाता है जो मिट्टी में कार्बन को भंडारण करने की क्षमता पर निर्भर करता है। इस प्रक्रिया को कार्बन भंडारण के रूप में जाना जाता है।'''
 
'''अर्थात वह खेती जो हर परिस्थिति में उगाई गई फसलों को विविध आपदाओं से सुरक्षित रखती है उसको संरक्षित खेती कहते हैं।'''
 
'''<u>संरक्षित कृषि से लाभ</u>'''
 
'''संरक्षित कृषि की वज़ह  से ज़मीन की उत्पादकता में काफी इजाफा होता है। साथ ही यह पानी, ऊर्जा और ज़मीन की उर्वरता का भी संरक्षण करती है। संरक्षित कृषि में मिट्टी की न्यूनतम जुताई की जाती है जिससे ईंधन एवं मानव श्रम दोनों की बचत होती है। क्योंकि कल्टीवेटर या रोटावेटर से मृदा की जुताई करने पर मृदा के भौतिक एवं रासायनिक गुणों में परिवर्तन आता है, जिससे मृदा क्षरण को बढ़ावा मिलता है।'''
 
'''संरक्षित कृषि प्रणाली को अपनाने से पर्यावरण एवं संसाधन दोनों का संरक्षण होता है। न्यूनतम जुताई, फसल अवशेष का स्थायी आवरण तथा फसल विविधीकरण अपनाने से मृदा एवं जल संसाधनों की गुणवत्ता और फसल की उत्पादक क्षमता बढ़ती है। फसल अवशेष जैव-विविधता, जैथ्वक गतिविधियों एवं वायुवीय गुणवत्ता में बढ़ोतरी करते हैं। यह कार्बन को संचय करने एवं मृदा तापमान को नियंत्रित करने में सहायक होती है।'''
 
'''संरक्षण खेती के अंतर्गत सिंचाई के लिये बूंद-बूंद सिंचाई, स्फ्रिंकलर सिंचाई तकनीक का उपयोग किया जाता है। इसकी वज़ह  से पानी हर पौधे तक समुचित मात्रा में पहुँचता है तथा पानी की काफी ज़्यादा बचत भी होती है'''
 
<code>टमाटर पूसा संरक्षित - 1</code>
 
<code>पूसा गोल्डन चेरी - 2</code>
 
<code>पूसा पाकचोय - 1</code>
 
'''✍️अरुण द्विवेदी अनन्त'''
 
'''     श्री अयोध्या धाम'''
 
'''     परियोजना सहायक'''
 
'''     सी पी सी टी'''
 
'''     भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान पूसा, नई दिल्ली'''
 
'''     ईमेल आईडी= [[Mailto:anantd722@gmail.com|anantd722@gmail.com]]'''
 
'''      संपर्क सूत्र= [[Tel:9918140485|9918140485]]'''
 
''<u>प्रस्तावना</u>''
 
 
 
''विश्व में भूमि क्षरण एक गंभीर पर्यावरणीय समस्या है जो कि हमारे पारिस्थितिकी तंत्र एवं खाद्य सुरक्षा के लिए एक खतरा है। भूमि क्षरण से मृदा का कटाव, पोषक तत्वों का दोहन, मृदा में कार्बनिक पदार्थों की कमी, मिट्टी की उत्पादन शक्ति में कमी, जैव विविधता में कमी, अनियमित भूजल स्तर, जलवायु परिवर्तन एवं आर्थिक नुकसान प्रमुख रुप से होता है। भारत में सभी प्रकार की जलवायु जैसे शीतोष्ण, सम शीतोष्ण, कटिबंधीय, उष्ण कटिबंधीय इत्यादि पर खेती की जाती है। विश्व की जनसंख्या बढ़ने के साथ-साथ भूमि क्षरण की समस्याएँ भी बढ़ती रहेंगी जिसकी वजह से उपजाऊ मृदा एवं अनाज के लिए विभिन्न देशों के बीच खाद्य सुरक्षा के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। इन समस्याओं से निपटने के लिये विश्व में भूमि क्षरण को रोकने तथा प्राकृतिक संसाधनों का इष्टत्म उपयोग एवं तरीकों पर पिछले कई वर्षों से विकल्पों की तलाश जारी है। भूमि संसाधन का उपयोग एवं प्रबन्धन की विधियों पर मृदा की उत्पादन क्षमता निर्भर करती है। मृदा में कार्बनिक पदार्थों का प्रबन्धन अति महत्वपूर्ण है क्योंकि यह मृदा संरचना के स्थिरिकरण के लिए आवश्यक है। सघन कृषि के अन्तर्गत खेतों की लम्बे समय तक जुताई करने से अधोसतह में एक मजबूत परत (क्रस्ट) बन जाती है जिससे मृदा संरचना पर गहरा प्रभाव पड़ता है।''
 
''वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन की वजह से असमय वर्षा, अनियमित वर्षा जल का वितरण, मार्च महीने में तापमान का एकाएक से बढ़ना (टर्मिनल हीट), औलावृष्टि, अतिवृष्टि, कीट व बीमारियों का प्रकोप इत्यादि जैसी कई गंभीर समस्याएं पूरे विश्व के सामने बाँहें फैलाये खड़ी हैं। भारत के अधिकांश हिस्सों में भू-जलस्तर वर्ष दर वर्ष नीचे जाता जा रहा है जो कि एक चिंता का विषय बना हुआ है फिर भी भू-जल का दोहन ज्यों का त्यों बना हुआ है।''
 
''अतः संरक्षित खेती आधुनिक तकनीक की व संरचना है जिसमें एक नियंत्रित वातावरण में फसलों की खेती की जाती है। इसमें कीट अवरोधी नेट हाउस, ग्रीन हाउस, नवीनतम तकनीक से लैस पालीहाउस, प्लास्टिक लो टनल, प्लास्टिक हाई टनल, प्लास्टिक मल्चिंग और ड्रिप सिंचाई का इस्तेमाल किया जाता है।''
 
''इसमें सब्जियों में शिमला मिर्च, बैंगन, गोभी, खीरा, टमाटर, मिर्च, तथा फलों में नींबू की प्रजाति एवं सजावटी फसलों में जरबेरा, ग्लेडियोलस, लिली व गुलाब की फसलों को आसानी से संरक्षित तकनीकी द्वारा उगाया जा सकता है।''
 
''<u>परिभाषा</u>''
 
''"जैविक व अजैविक कारकों से बचाते हुए जब हम किसी फसल का उत्पादन सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित तरीके से करते हैं उसे 'संरक्षित खेती (कृषि)' कहते हैं।"''
 
''"संरक्षित कृषि वह तकनीकी है जिसमें पौधों के आसपास सूक्ष्म वातावरण तैयार कर पौधों के वृद्धिकाल में आवश्यकता के अनुरूप संरक्षित किया जाता है"''
 
''<u>आवश्यकता</u>''
 
''हमारे देश में सब्जियों की कम उत्पादकता एवं निम्न गुणवत्ता का मुख्य कारण खेती का लगभग शत प्रतिशत खुले वातावरण में किया जाना है। तथा दूसरा कृषकों द्वारा सब्जी उत्पादन में अभी भी परंपरागत विधियों तथा तकनीकों का अपनाया जाना है। खुले वातावरण में अनेकों प्रकार के जैविक - अजैविक कारकों द्वारा सब्जी तथा अन्य फसलों को भारी नुकसान पहुंचता है। जिसके कारण फसलों की उत्पादकता एवं गुणवत्ता पर दुष्प्रभाव पड़ता है। इसीलिए कृषि में नई तकनीकी का इस्तेमाल करना, जिससे उत्पादन पर कोई असर न पड़े और शुद्ध एवं संतोषजनक उत्पादन प्राप्त होता रहे।''
 
''संरक्षित खेती नए युग की नवीनतम कृषि प्रणाली है। जिसमें फसलों की मांग के अनुसार वातावरण को नियंत्रित करते हुए महंगी फसलों के लिए वातानुकूलित माहौल स्थापित किया जाता है।''
 
''<u>इतिहास</u>''
 
''प्राचीन समय में जब खेती की विकास गाथा में पानी के ज्यादा इस्तेमाल, उर्वरक और ऊर्जा का अधिक इस्तेमाल करने वाली तकनीकों की अहम भूमिका हुआ करती थी। लेकिन अब वक्त बदल रहा है। आज कृषि के विकास के साथ-साथ इस बात का भी खास ख्याल रखा जा रहा है कि इनका इस्तेमाल कम से कम हो, ताकि लागत कम होने के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरण की सेहत पर भी इसका बुरा असर न हो।''
 
''इस नई खेती की शुरुआत 2000 के आसपास हुई थी।''
 
''<u>वर्तमान स्थिति</u>''
 
''वर्तमान में वैश्विक स्तर पर, संरक्षित खेती लगभग 125 मिलियन हेक्टेयर में की जाती है. संरक्षित खेती को बढ़ावा देने वालों देशों में अमेरिका, ब्राजील, अर्जेंटीना, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया अग्रणी देश हैं।''
 
''भारत में, संरक्षित खेती अभी भी शुरुआती चरणों में है। पिछले कुछ वर्षों में, जीरो जुताई और संरक्षित खेती को अपनाने से लगभग 1.5 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र का विस्तार हुआ है। गंगा-सिन्धु के मैदानी इलाकों में चावल-गेहूँ कृषि प्रणाली में गेहूँ में संरक्षण आधारित कृषि को अपनाया जा रहा है. भारत में, राज्य कृषि विश्वविद्यालयों और आईसीएआर संस्थानों संयुक्त प्रयासों से संरक्षित खेती के विकास और प्रसार करने का प्रयास किया जा रहा है।''
 
''<u>संरक्षित खेती की परिकल्पना</u>''
 
''भारत में, संरक्षित खेती प्रौद्योगिकी वाणिज्यिक उत्पादन के लिए लगभग तीन दशक ही पुरानी है, जबकि विकसित देशों जैसे जापान, रुस, ब्रिटेन, चीन, हॉलैंड और अन्य देशों में दो सदी पुरानी है। इजराइल एक ऐसा देश है जहां किसानों ने अच्छी गुणवत्ता वाले फल, फूल और सब्जियों को कम पानी वाले रेगिस्तानी क्षेत्रों में उगाकर इस तकनीक से अच्छे उत्पादन के साथ बढ़िया मुनाफा भी कमा रहे हैं। हॉलैंड ने पॉलीहाउस की उन्नत तकनीक विकसित करके दुनिया के फूल निर्यात जगत में 70 प्रतिशत का योगदान दिया है।''
 
''संरक्षित खेती नवीनतम् तकनीक की वह संरचना है, जिसमें एक नियंत्रित वातावरण के अंर्तगत मूल्यवान फसलों की खेती की जाती है। ये संरक्षित संरचनाएं कीट अवरोधी नेट हाउस, ग्रीन हाउस, नवीनतम् तकनीक से लैस पॉलीहाउस, प्लास्टिक लो-टनल, प्लास्टिक हाई-टनल, प्लास्टिक मल्चिंग और ड्रिप सिंचाई तकनीक आदि प्रकार की होती हैं।''
 
''विश्व में सब्जियों के कुल उत्पादन में भारत का चीन के बाद दूसरा स्थान है। सब्जियों की प्रति व्यक्ति उपलब्धता आवश्यकता से कम है। हरित क्रांति के बाद बढ़ती खाद्य और पोषण सम्बन्धी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उत्पादन की मात्रा के साथ-साथ कृषि उत्पाद की गुणवत्ता पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है।''
 
''भारत में बढ़ती हुई जनसंख्या एवं खाद्य संबंधित मांग को पूरा करने के लिए सब्जियों के फसलोत्पादन में वृद्धि करने की अत्यन्त आवश्यकता है।''
 
''<u>उद्देश्य</u>''
 
''संरक्षित कृषि के माध्यम से फसलों की मांग के अनुसार सूक्ष्म वातावरण को नियन्त्रित करते हुए मूल्यवान सब्जियों की खेती का प्राकृतिक प्रकोपों एवं अन्य समस्याओं से बचाव किया जाता है, और कम से कम क्षेत्रफल में अधिक से अधिक गुणवत्ता युक्त उत्पादन प्राप्त किया जाता है।''
 
''वर्तमान परिस्थितियों में परिनगरीय एवं शहरी क्षेत्रों के लघु एवं सीमान्त किसानों हेतु रोजगारपरक तकनीकी साबित हो रही है।''
 
''संसाधन संरक्षण तकनीकियों से फसलों में उच्चतम् परिणाम तभी आते हैं जब सिंचाई जल उत्पादकता, उर्वरक उपयोग दक्षता एवं फसल पकाव में सुधार होता है व खरपतवार दबाव कम होता है। विभिन्न क्षेत्रों में इस तकनीकी का प्रसारण तेजी से हो रहा है।''
 
''संरक्षण खेती खाद्य सुरक्षा के लिए भविष्य की योजना–क्लाईमेट स्मार्ट खेती प्राकृतिक प्रक्रियाओं में परिवर्तन के कारण जलवायु में लगातार परिवर्तन हो रहा है जो एक चिंता का विषय बना हुआ है। संरक्षण खेती की तकनीकियों को अपनाते हुये हमें ऐसी खेती की आवश्यकता होगी जो समय के साथ चलते हुये सभी प्राकृतिक एवं अप्राकृतिक संसाधनों का उचित उपयोग करते हुये टिकाऊ उत्पादन देने में सक्षम हो। ऐसे समय में हमारे सामने क्लाईमेट स्मार्ट खेती का नाम उभरकर सामने आता है। इस विषय पर अध्ययनरत् वैज्ञानिकों का मानना है कि मानवीय गतिविधियों के कारण जलवायु परिवर्तन की वर्तमान दर पिछले 10,000 साल के किसी भी समय की तुलना में तेजी से हुई है। मानवीय गतिविधियों की वजह से उत्सर्जन के नए स्रोतों ने वृद्धि एवं जंगलों के आकार को भी निरंतर प्रभावित किया है। हरितगृह (ग्रीन हाउस) गैसों के उत्सर्जन में मानव जनितक्रियाओं द्वारा वर्ष 1970 से 2004 के बीच 70 प्रतिशत से भी अधिक वृद्धि हुई है और अनुमान है कि 25 से 95 प्रतिशत तक की वृद्धि वर्ष 2030 तक हो सकती है। जलवायु परितर्वन पर अंतर सरकारी पैनल (आईपीसीसी) ने अपनी चौथी आंकलन रिपोर्ट में कहा है कि जलवायु परिवर्तन 1990 के बाद तेजी से बढ़ा है इसके लिए मानवीय गतिविधियों को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है जिसका पारिस्थितिकी प्रणालियों पर प्रभाव पड़ेगा। जीवाश्म ईंधन के दोहन और कृषि पद्धतियों से 20वीं सदी के दौरान वैश्विक तापमान में औसतन वृद्धि क्रमशः 0.6 डिग्री सेल्सियस एवं 0.17 डिग्री सेल्सियस हुई है।''
 
''कृषि फसलें उगाने से वायुमण्डलीय कार्बन का स्थिरीकरण किया जाता है जो मिट्टी में कार्बन को भंडारण करने की क्षमता पर निर्भर करता है। इस प्रक्रिया को कार्बन भंडारण के रूप में जाना जाता है।''
 
''अर्थात वह खेती जो हर परिस्थिति में उगाई गई फसलों को विविध आपदाओं से सुरक्षित रखती है उसको संरक्षित खेती कहते हैं।''
 
''<u>संरक्षित कृषि से लाभ</u>''
 
 
''चत भी होती है।''
 
''<u>पूसा की नई विकसित किस्में-</u>''
 
''<code>टमाटर पूसा संरक्षित-1</code>''
 
''<code>पूसा गोल्डन चेरी-2</code>''
 
''<code>पूसा पाकचोय-1</code>''
 
✍️<big>'''अरुण द्विवेदी अनन्त'''</big>
 
<big>'''  श्री अयोध्या धाम'''</big>
 
<big>'''  परियोजना सहायक'''</big>
 
<big>'''  सी पी सी टी'''</big>
 
<big>'''  भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान पूसा, नई दिल्ली'''</big>
 
<big>'''  ईमेल आईडी= anantd722@gmail.com'''</big>
 
<big>'''  संपर्क सूत्र= 9918140485'''</big>