"भाप" के अवतरणों में अंतर

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==भाप के गुण==
[[चित्र:TS-Wasserdampf engl.png|right|thumb|300px|ताप के साथ जलवाष्प की इंट्रॉपी का विचरण]]
जब [[वाष्प इंजन|भापइंजन]] में भाप का बहुत अधिक व्यावहारिक उपयोग होने लगा, तब भी इसके गुणों का सैद्धांतिक अध्ययन नहीं हुआ था। अतएव इसके बारे में विस्तृत जानकारी नहीं प्राप्त थी। भाप का अध्ययन 19वीं सदी में [[जॉन डाल्टन]], [[जेम्स वाट]], [[रेनो]] इत्यादि ने किया था। भाप के गुणों के बारे में आधुनिकतम समीक्षा जोसेफ एच. कीनान (Joseph H. Keenan) की मानी जाती है, जो 1936 ई. में प्रकाशित हुई थी।
 
भाप के गुणों का अध्ययन करने के लिए [[पूर्ण ऊष्मा]] (enthalpy) का उपयोग किया जाता है। पूर्ण ऊष्मा की मात्रा निम्नलिखित समीकरण से प्राप्त होती है :
 
; h = u + Apv
 
यहाँ '''u''' आंतरिक ऊर्जा, '''p''' दाब, '''v''' आयतन और '''A''' गुणांक है, जो [[कार्य]] के एकक को [[ऊष्मा]] के एकक में परिणत करता है। विभिन्न दाब और ताप पर पूर्ण ऊष्मा का मान इसका गुण व्यक्त करता है। कीनान की समीक्षा में विभिन्न दाब और ताप पर पूर्ण ऊष्मा का मान सारणी के रूप में दिया है।
 
यदि गरम वाष्प को ठंडा किया जाए तो इसका ताप घटते हुए 100 सें. तक आता है और उसके बाद [[द्रवण]] आरंभ हो जाता है। द्रवण के लिए छोटे-छोटे कणों की आवश्यकता होती है, जिनपर वाष्प जमता है। यदि वाष्प इस प्रकार के कणों से सर्वथा रहित हो उसे शीघ्रता से ठंडा किया जाए, तो वाष्प का ताप 100 सें. से भी नीचे आ सकता है। इस अवस्था को '''अतिशीतित भाप''' (Supercooled steam) कहते हैं। यह अवस्था अस्थायी होती है और शीघ्र ही वाष्प द्रवित होने लगती है।