"रसखान": अवतरणों में अंतर

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[[File:Tomb of Raskhan at Mahaban.jpg|thumb|300px|महाकवि रसखान की महाबन (जिला [[मथुरा]]) में स्थित समाधि]]
[[File:महाकवि रसखान की महाबन (जिला मथुरा) में स्थित समाधि (2).jpg|thumb|300px|समाधि]]
[[भारतेन्दु हरिश्चंद्र|भारतेन्दु हरिश्चन्द्र]] ने जिन मुस्लिम हरिभक्तों के लिये कहा था, "इन मुसलमान हरिजनन पर कोटिन हिन्दू वारिए" उनमें रसखान का नाम सर्वोपरि है। [[बोधा]] और [[आलम]] भी इसी परम्परा में आते हैं। सय्यद इब्राहीम "रसखान" का जन्म अन्तर्जाल पर उपलब्ध स्रोतों के अनुसार सन् 16141533 से 16301558 के बीच कभी हुआ था। कई विद्वानों के अनुसार इनका जन्म सन् 15481590 ई. में हुआ था। चूँकि [[अकबर]] का राज्यकाल 1556-1605 है, ये लगभग अकबर के समकालीन हैं। इनका जन्म स्थान पिहानी जो कुछ लोगों के मतानुसार [[दिल्ली]] के समीप है। कुछ और लोगों के मतानुसार यह पिहानी उत्तरप्रदेश के [[हरदोई जिला|हरदोई जिले]] में है।माना जाता है की इनकी मृत्यु 1628 में वृन्दावन में हुई थी । यह भी बताया जाता है कि रसखान ने [[भागवत पुराण|भागवत]] का अनुवाद [[फ़ारसी भाषा|फारसी और हिंदी]] में किया है।
 
== परिचय ==
रसखान के जन्म के सम्बंध में विद्वानों में मतभेद पाया जाता है। रसखानअनेक केविद्वानों अनुसारने गदरइनका केजन्म कारणसंवत् [[दिल्ली]]1615 शमशानई. बन चुकी थी, तब दिल्ली छोड़कर वह [[बृज|ब्रज]] ([[मथुरा]]) चले गए। ऐतिहासिक साक्ष्य के आधार पर पता चलतामाना है किऔर उपर्युक्तकुछ गदरने सन् 16131630 ई. में हुआ था। उनकी बात से ऐसा प्रतीत होता है कि वह उस समय वयस्क हो चुकेमाना थे।है।
रसखान के अनुसार गदर के कारण [[दिल्ली]] शमशान बन चुकी थी, तब दिल्ली छोड़कर वह [[बृज|ब्रज]] ([[मथुरा]]) चले गए। ऐतिहासिक साक्ष्य के आधार पर पता चलता है कि उपर्युक्त गदर सन् 1613 ई. में हुआ था। उनकी बात से ऐसा प्रतीत होता है कि वह उस समय वयस्क हो चुके थे।
 
रसखान का जन्म संवत् 15481590 ई. मानना अधिक समीचीन प्रतीत होता है। भवानी शंकर याज्ञिक का भी यही मानना है। अनेक तथ्यों के आधार पर उन्होंने अपने मत की पुष्टि भी की है। ऐतिहासिक ग्रंथों के आधार पर भी यही तथ्य सामने आता है। यह मानना अधिक प्रभावशाली प्रतीत होता है कि रसखान का जन्म सन् 15481590 ई. में हुआ था।
 
रसखान के जन्म स्थान के विषय में भी कई मतभेद है। कई विद्वान उनका जन्म स्थल पिहानी अथवा दिल्ली को मानते है। [[शिवसिंहसरोज|शिवसिंह सरोज]] तथा हिन्दी साहित्य के प्रथम इतिहास तथा ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर रसखान का जन्म स्थान पिहानी जिला हरदोई माना जाए।