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'''[https://rajasthanknowledgegk.blogspot.com/2018/03/maharana-pratap.html महाराणा प्रताप सिंह सिसोदिया]''' ''( ज्येष्ठ शुक्ल तृतीया रविवार विक्रम संवत 1597 तदनुसार 9 मई 1540 – 19 जनवरी 1597)'' [[उदयपुर]], [[मेवाड़|मेवाड]] में [[सिसोदिया]] [[राजपूत]] राजवंश के राजा थे।<ref>{{Cite web|url=http://hindi.webdunia.com/indian-history-and-culture/history-of-maharana-pratap-in-hindi-115052100030_1.html|title=मेवाड़ का वीर योद्धा महाराणा प्रताप {{!}} history of maharana pratap in hindi|last=Webdunia|first=|date=|website=hindi.webdunia.com|language=hi|archive-url=https://hindi.webdunia.com/indian-history-and-culture/history-of-maharana-pratap-in-hindi-115052100030_4.html|archive-date=2019-08-07|dead-url=|access-date=2020-11-24}}</ref> उनका नाम [[इतिहास]] में वीरता, शौर्य, त्याग, पराक्रम और दृढ प्रण के लिये अमर है। उन्होंने मुगल सम्राट [[अकबर]] की अधीनता स्वीकार नहीं की और कई सालों तक संघर्ष किया। महाराणा प्रताप सिंह ने मुगलों को कईं बार युद्ध में भी हराया।<ref>{{Cite web|url=https://infohindi.com/maharana-pratap-ki-jivani-biography-mah/|title=महाराणा प्रताप की जीवनी Biography of Maharana Pratap in Hindi|date=2016-06-06|website=InfoHindi.com|language=en-US|access-date=2020-11-24}}</ref>
 
उनका जन्म वर्तमान [[राजस्थान]] के [[कुम्भलगढ़ दुर्ग|कुम्भलगढ़]] में महाराणा [[उदयसिंह द्वितीय|उदयसिंह]] एवं माता रानी जयवन्ताबाई के घर हुआ था। लेखक [[जेम्स टॉड]] के अनुसार महाराणा प्रताप का जन्म मेवाड़ के कुम्भलगढ में हुआ था। इतिहासकार [[विजय नाहर]] के अनुसार राजपूत समाज की परंपरा व महाराणा प्रताप की जन्म कुण्डली व कालगणना के अनुसार महाराणा प्रताप का जन्म पाली के राजमहलों में हुआ।<ref>{{Cite book|author= विजय नाहर|title=हिन्दुवा सूर्य महाराणा प्रताप|publisher=पिंकसिटी पब्लिशर्स, जयपुर| isbn=978-93-80522-45-6|year=2011|page= 276}}</ref><ref>{{cite web|title=‘स्वाभिमान की जंग में प्रताप ने दे डाली प्राणों की आहुति’|url=https://m.patrika.com/kolkata-news/pratap-jayanti-4571388/|website=www.m.patrika.com|accessdate=15 May 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190517045322/https://m.patrika.com/kolkata-news/pratap-jayanti-4571388/|archive-date=17 मई 2019|url-status=dead}}</ref><ref>{{cite web|title=महाराणा प्रताप को मुख्यमंत्री ममता ने दी श्रद्धांजलि|url=https://indias.news/%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A3%E0%A4%BE-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%AA-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%96%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%AE/|website=www.indias.news.com|accessdate=9 May 2019}}{{Dead link|date=जून 2020 |bot=InternetArchiveBot }}</ref>
 
==जन्म स्थान==
[https://rajasthanknowledgegk.blogspot.com/2018/03/maharana-pratap.html महाराणा प्रताप] के जन्मस्थान के प्रश्न पर दो धारणाएँ है। पहली महाराणा प्रताप का जन्म [[कुम्भलगढ़ दुर्ग]] में हुआ था क्योंकि महाराणा उदयसिंह एवम जयवंताबाई का विवाह कुंभलगढ़ महल में हुआ। दूसरी धारणा यह है कि उनका जन्म [[पाली]] के राजमहलों में हुआ। '''महाराणा प्रताप की माता का नाम जयवंता बाई था, जो पाली के सोनगरा अखैराज की बेटी थी।''' महाराणा प्रताप का बचपन भील समुदाय के साथ बिता , भीलों के साथ ही वे युद्ध कला सीखते थे , भील अपने पुत्र को किका कहकर पुकारते है इसलिए भील महाराणा को कीका नाम से पुकारते थे।<ref>{{Cite web|url=https://m-hindi.webdunia.com/indian-history-and-culture/history-of-maharana-pratap-in-hindi-115052100030_1.%7D%7D|title=History of Maharana Pratap|last=|first=|date=|website=m-hindi.webdunia.com|language=hi|archive-url=|archive-date=|dead-url=|access-date=2020-12-07}}</ref> लेखक [[विजय नाहर]] की पुस्तक ''हिन्दुवा सूर्य महाराणा प्रताप'' के अनुसार जब प्रताप का जन्म हुआ था उस समय उदयसिंह युद्व और असुरक्षा से घिरे हुए थे।<ref>[[विजय नाहर]] (2017) ''"हिंडुआ सूरज मेवाड़ रतन"'', पिंकसिटी पब्लिशर्स, [[राजस्थान]] {{ISBN|9789351867210}}</ref> कुंभलगढ़ किसी तरह से सुरक्षित नही था। [[जोधपुर]] का [[राव मालदेव|राजा मालदेव]] उन दिनों उत्तर भारत मे सबसे शक्तिसम्पन्न था। एवं जयवंता बाई के पिता एवम पाली के शाषक सोनगरा अखेराज मालदेव का एक विश्वसनीय सामन्त एवं सेनानायक था।
 
इस कारण पाली और मारवाड़ हर तरह से सुरक्षित था। अतः जयवंता बाई को पाली भेजा गया। वि. सं. ज्येष्ठ शुक्ला तृतीया सं 1597 को प्रताप का जन्म पाली मारवाड़ में हुआ। प्रताप के जन्म का शुभ समाचार मिलते ही उदयसिंह की सेना ने प्रयाण प्रारम्भ कर दिया और मावली युद्ध मे बनवीर के विरूद्ध विजय श्री प्राप्त कर चित्तौड़ के सिंहासन पर अपना अधिकार कर लिया।<ref>{{Cite book|author=विजय नाहर|title=हिन्दुवा सूर्य महाराणा प्रताप|publisher=पिंकसिटी पब्लिशर्स| isbn=978-93-80522-45-6|year=2011|page= 274-278}}</ref><ref>{{cite web|title=महाराणा प्रताप के विषय में भारतीय इतिहास में लिखी भ्रांतियों को दूर करती विजय नाहर की पुस्तक "हिंदुवा सूर्य महाराणा प्रताप" की समीक्षा|url=https://udaipurkiran.in/hindi/1208578/|website=www.udaipurkiran.in|accessdate=9 May 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190509155336/https://udaipurkiran.in/hindi/1208578/|archive-date=9 मई 2019|url-status=dead}}</ref> भारतीय प्रशासनिक सेवा से सेवानिवत्त अधिकारी देवेंद्र सिंह शक्तावत की पुस्तक ''महाराणा प्रताप के प्रमुख सहयोगी'' के अनुसार महाराणा प्रताप का जन्म स्थान महाराव के गढ़ के अवशेष जूनि कचहरी पाली में विद्यमान है। यहां सोनागरों की कुलदेवी नागनाची का मंदिर आज भी सुरक्षित है। पुस्तक के अनुसार पुरानी परम्पराओं के अनुसार लड़की का पहला पुत्र अपने पीहर में होता है।<ref>{{cite web|title=एक महान वीर योद्धा – जननायक महाराणा प्रताप – MAHARANA PRATAP|url=http://sahityapreetam.com/blog/eka-maha-na-va-ra-ya-tha-thha-janana-yaka-maha-ra-nae-pa-rata-pa-maharana-pratap|website=www.sahityapreetam.com|accessdate=26 May 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190526095402/http://sahityapreetam.com/blog/eka-maha-na-va-ra-ya-tha-thha-janana-yaka-maha-ra-nae-pa-rata-pa-maharana-pratap|archive-date=26 मई 2019|url-status=dead}}</ref>