"भारत का संविधान" के अवतरणों में अंतर

टैग: मोबाइल संपादन मोबाइल वेब सम्पादन
टैग: मोबाइल संपादन मोबाइल वेब सम्पादन
 
== संक्षिप्त परिचय ==
भारतीय संविधान में वर्तमान समय में भी केवल 395 अनुच्छेद, तथा 12 अनुसूचियाँ हैं और ये 25 भागों में विभाजित है। परन्तु इसके निर्माण के समय मूल संविधान में 395 अनुच्छेद जो 22 भागों में विभाजित थे इसमें केवल 8 अनुसूचियाँ थीं। संविधान में [[भारत सरकार|सरकार]] के संसदीय स्‍वरूप की व्‍यवस्‍था की गई है जिसकी संरचना कुछ अपवादों के अतिरिक्त [[संघवाद|संघीय]] है। केन्‍द्रीय कार्यपालिका का सांविधानिक प्रमुख [[भारतीय राष्ट्रपति|राष्‍ट्रपति]] है। भारत के संविधान की धारा 79 के अनुसार, केन्‍द्रीय [[संसद]] की परिषद् में राष्‍ट्रपति तथा दो सदन है जिन्‍हें राज्‍यों की परिषद [[राज्‍यसभा]] तथा लोगों का सदन [[लोकसभा]] के नाम से जाना जाता है। संविधान की धारा 74 (1) में यह व्‍यवस्‍था की गई है कि राष्‍ट्रपति की सहायता करने तथा उसे सलाह देने के लिए एक रूप होगा जिसका प्रमुख [[प्रधानमन्त्री]] होगा, राष्‍ट्रपति इस मन्त्रिपरिषद की सलाह के अनुसार अपने कार्यों का निष्‍पादन करेगा। इस प्रकार वास्‍तविक कार्यकारी शक्ति मन्त्रिपरिषद में निहित है जिसका प्रमुख [[प्रधानमन्त्री]] है जो वर्तमान में [[नरेन्द्र मोदी]] हैं।<ref>{{Cite web |url=http://parliamentofindia.nic.in/ls/debates/facts.htm |title=संग्रहीत प्रति |access-date=26 नवंबर 2016 |archive-url=https://web.archive.org/web/20110511104514/http://parliamentofindia.nic.in/ls/debates/facts.htm |archive-date=11 मई 2011 |url-status=live }}</ref> मन्त्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोगों के सदन (लोक सभा) के प्रति उत्तरदायी है। प्रत्‍येक राज्‍य में एक [[विधानसभा]] है। [[उत्तर प्रदेश]], [[बिहार]], [[महाराष्ट्र]], [[कर्नाटक]],[[आन्ध्रप्रदेश]] और [[तेलंगाना]] में एक ऊपरी सदन है जिसे [[विधानपरिषद]] कहा जाता है। [[राज्‍यपाल]] राज्‍य का प्रमुख है। प्रत्‍येक राज्‍य का एक राज्‍यपाल होगा तथा राज्‍य की कार्यकारी शक्ति उसमें निहित होगी। मन्त्रिपरिषद, जिसका प्रमुख [[मुख्‍यमन्त्री]] है, राज्‍यपाल को उसके कार्यकारी कार्यों के निष्‍पादन में सलाह देती है। राज्‍य की मन्त्रिपरिषद से राज्‍य की विधान सभा के प्रति उत्तरदायी है।
भारतीय संविधान में वर्तमान समय में भी केवल 395
अनुच्छेद, तथा 12 अनुसूचियाँ हैं और ये 25 भागों में विभाजित है। परन्तु इसके निर्माण के समय मूल संविधान में 395 अनुच्छेद जो 22 भागों में विभाजित थे इसमें केवल 8 अनुसूचियाँ थीं। संविधान में [[भारत सरकार|सरकार]] के संसदीय स्‍वरूप की व्‍यवस्‍था की गई है जिसकी संरचना कुछ अपवादों के अतिरिक्त [[संघवाद|संघीय]] है। केन्‍द्रीय कार्यपालिका का सांविधानिक प्रमुख [[भारतीय राष्ट्रपति|राष्‍ट्रपति]] है। भारत के संविधान की धारा 79 के अनुसार, केन्‍द्रीय [[संसद]] की परिषद् में राष्‍ट्रपति तथा दो सदन है जिन्‍हें राज्‍यों की परिषद [[राज्‍यसभा]] तथा लोगों का सदन [[लोकसभा]] के नाम से जाना जाता है। संविधान की धारा 74 (1) में यह व्‍यवस्‍था की गई है कि राष्‍ट्रपति की सहायता करने तथा उसे सलाह देने के लिए एक रूप होगा जिसका प्रमुख [[प्रधानमन्त्री]] होगा, राष्‍ट्रपति इस मन्त्रिपरिषद की सलाह के अनुसार अपने कार्यों का निष्‍पादन करेगा। इस प्रकार वास्‍तविक कार्यकारी शक्ति मन्त्रिपरिषद में निहित है जिसका प्रमुख [[प्रधानमन्त्री]] है जो वर्तमान में [[नरेन्द्र मोदी]] हैं।<ref>{{Cite web |url=http://parliamentofindia.nic.in/ls/debates/facts.htm |title=संग्रहीत प्रति |access-date=26 नवंबर 2016 |archive-url=https://web.archive.org/web/20110511104514/http://parliamentofindia.nic.in/ls/debates/facts.htm |archive-date=11 मई 2011 |url-status=live }}</ref>
 
मन्त्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोगों के सदन (लोक सभा) के प्रति उत्तरदायी है। प्रत्‍येक राज्‍य में एक [[विधानसभा]] है। [[उत्तर प्रदेश]], [[बिहार]], [[महाराष्ट्र]], [[कर्नाटक]],[[आन्ध्रप्रदेश]] और [[तेलंगाना]] में एक ऊपरी सदन है जिसे [[विधानपरिषद]] कहा जाता है। [[राज्‍यपाल]] राज्‍य का प्रमुख है। प्रत्‍येक राज्‍य का एक राज्‍यपाल होगा तथा राज्‍य की कार्यकारी शक्ति उसमें निहित होगी। मन्त्रिपरिषद, जिसका प्रमुख [[मुख्‍यमन्त्री]] है, राज्‍यपाल को उसके कार्यकारी कार्यों के निष्‍पादन में सलाह देती है। राज्‍य की मन्त्रिपरिषद से राज्‍य की विधान सभा के प्रति उत्तरदायी है।
 
संविधान की सातवीं अनुसूची में संसद तथा राज्‍य विधायिकाओं के बीच विधायी शक्तियों का वितरण किया गया है। अवशिष्‍ट शक्तियाँ संसद में विहित हैं। केन्‍द्रीय प्रशासित भू-भागों को संघराज्‍य क्षेत्र कहा जाता है।
93

सम्पादन