"राजपुताना": अवतरणों में अंतर

941 बाइट्स जोड़े गए ,  1 वर्ष पहले
Reverted to revision 5311316 by रोहित साव27: पिछले बदलावों को अस्वीकार किया। (TwinkleGlobal)
[अनिरीक्षित अवतरण][अनिरीक्षित अवतरण]
No edit summary
टैग: Reverted मोबाइल संपादन मोबाइल वेब संपादन References removed
(Reverted to revision 5311316 by रोहित साव27: पिछले बदलावों को अस्वीकार किया। (TwinkleGlobal))
टैग: किए हुए कार्य को पूर्ववत करना
[[चित्र: 1909.jpg|thumb|right|250px| [[राजस्थान]] पहले राज्य/क्षेत्र/प्रदेश के रूप में जाना जाता था। 1909 का ब्रिटिशकालीन नक्शा ]]
[[चित्र:Map rajasthan dist all shaded.png|thumb|right|250px|मौजूदा [[राजस्थान]] के ज़िलों का मानचित्र]]
[[चित्र:Map rajasthan dist all shaded.png|thumb|right|250px|मौजराजपूत प्राचीन क्षत्रिय परिवारों का हिस्सा हैं और 36 कुलों में विभाजित हैं। राजपूत बड़े वीर और स्वाभिमानी होते हैं और उनके अंदर त्याग, साहस, देश भक्ति ऐसे अन्य प्रकार के गुण कूट-कूट कर भरे हुए होते हैं।23 जुल॰ 2021
'''राज्य/क्षेत्र/प्रदेश''' जिसे '''राजस्थान''' भी कहा जाता है। राजपूतों की राजनीतिक सत्ता आयी तथा ब्रिटिशकाल में यह राज्य/क्षेत्र/प्रदेश नाम से जाने जाना लगा।<ref>John Keay (2001). India: a history. Grove Press. pp. 231–232</ref> इस प्रदेश का आधुनिक नाम [[राजस्थान]] है, जो उत्तर [[भारत]] के पश्चिमी भाग में अरावली की पहाड़ियों के दोनों ओर फैला हुआ है। इसका अधिकांश भाग मरुस्थल है। यहाँ वर्षा अत्यल्प और वह भी विभिन्न क्षेत्रों में असमान रूप से होती है। यह मुख्यत: वर्तमान [[राजस्थान]] राज्य की भूतपूर्व रियासतों का समूह है, जो [[भारत]] का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा है। [[राजपूत]] समाज राजस्थान का एक अहम हिस्सा है और यह जाति राजस्थान की सबसे बड़ी जनजाति है
 
== भौगोलिक स्थिति ==
 
== इतिहास ==
'''भारत में मुसलमानों का राज्य''' स्थापित होने के पूर्व [[राजस्थान]] में कई शक्तिशाली क्षत्रिय गुर्जर(राजपूत) प्रतिहार जातिजातियों के वंशजवंश शासन कर रहे थे तथा गुर्जर प्रतिहारों के पतन के बाद राजपूतों का उदय हुआ और उनमें सबसे प्राचीन चालुक्य और राष्ट्रकूट थे। इसके उपरान्त [[कन्नौज]] के राठौरों (राष्ट्रकूट), [[अजमेर]] के चौहान राजपूत, अन्हिलवाड़ के सोलंकियों, [[मेवाड़]] के गहलोतों या सिसोदियों और जयपुर के कछवाहों ने इस प्रदेश के भिन्न-भिन्न भागों में अपने राज्य स्थापित कर लिये। क्षत्रिय जातियों में फूट और परस्पर युद्धों के फलस्वरूप वे शक्तहीन हो गए। यद्यपि इनमें से अधिकांश ने बारहवीं शताब्दी के अन्तिम चरण में मुसलमान आक्रमणकारियों का वीरतापूर्वक सामना किया,
==== राणा साँगा ====
दिल्ली सल्तनत की सत्ता स्वीकार करने के बाद भी मुसलमानों की यह प्रभुसत्ता राजपूत शासकों को सदेव खटकती रही और जब कभी दिल्ली सल्तनत में दुर्बलता के लक्षण दृष्टिगत होते, वे अधीनता से मुक्त होने को प्रयत्नशील हो उठते। 1520 ई. में [[बाबर]] के नेतृत्व में मुग़लों के आक्रमण के समय राजपूताना दिल्ली के सुल्तानों के प्रभाव से मुक्त हो चला था और मेवाड़ के राणा [[राणा साँगा|संग्राम सिंह]] ने बाबर के दिल्ली पर अधिकार का विरोध किया। बयाना के युद्ध फरवरी 1527ई में [[राणा संगा]] ने बाबर को धूल चटाया 1527ई. में खानवा के युद्ध में बाबर ने विश्वासघात किया इधर राजपूताने की तलवार लड़ रही थी उधर बाबर ने तोपों का इस्तेमाल किया। इस युद्ध में तोपों से तलवारे लड़ी थी, शुरू में राणा की पकड़ बनी रही युद्ध पर बाद में एक तीर आकर राणा के सर पर लगा जिससे वो मूर्छित हो गए और राणा की पराजय हुई और [[मुग़ल|मुग़लों]] ने दिल्ली के सुल्तानों का राजपूताने पर नाममात्र को बचा प्रभुत्व फिर से स्थापित कर लिया।