"वैद्यनाथ मन्दिर, देवघर" के अवतरणों में अंतर

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{{Infobox Mandir
| name = वैद्यनाथ मन्दिर, देवघर
| image =Baba_Dham.jpg
| image =Temples at Deorgag, Santal Parhanas, Bihar - William Hodges, 1782 - BL Foster 396.jpg
| caption = बैद्यनाथ शिव मंदिर और पार्वती माता का मंदिर के साथ एक पवित्र लाल रस्सी से बंधा हुआ है
| caption = विलियम होज़ेज द्वारा निर्मित तैल चित्र, 1782
| country = [[भारत]]
| state = [[झारखंड|झारखण्ड]]
| district = [[देवघर]]
| location =[[देवघर]],[[ झारखंड]]
| elevation_m =
| primary_deity = बाबा [[वैद्यनाथ]] ([[भगवान शिव]])
| important_festivals= [[महाशिवरात्रि]]
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| inscriptions =
| date_built =
| creator = राजा पूरनमल (वर्तमान में उपस्थित मंदिर के निर्माता), [[विश्वकर्मा]] (प्राचीन मंदिर निर्माता)
| creator = राजा पूरनमल
| temple_board =बाबा[[ बैद्यनाथ]] मन्दिर प्रबन्ध परिषद
| website = [http://www.babadham.org/ babadham.org]
|deity=भगवान [[वैद्यनाथ]] (भगवान [[शिव]] के ज्योतिर्लिंग अवतार), [[सती|जया दुर्गा]] (शिवलिंग पर स्थित शक्ति पीठ)}}
}}
 
'''वैद्यनाथ मन्दिर, देवघर''' ([[अंग्रेजी]]:Baidyanath Temple) [भारतवर्ष]] के राज्य [[झारखंड]] में अतिप्रसिद्ध [[देवघर]] नामक स्‍थान पर अवस्थित है।<ref>{{Cite web |url=http://www.shivshaktidham.in/baijnath-jyotirlinga |title=संग्रहीत प्रति |access-date=7 दिसंबर 2015 |archive-url=https://web.archive.org/web/20150217161204/http://www.shivshaktidham.in/baijnath-jyotirlinga |archive-date=17 फ़रवरी 2015 |url-status=dead }}</ref><ref>{{Cite web |url=http://www.templesofindia.net/content/baba-baidyanath-temple-deoghar-jharkhand |title=संग्रहीत प्रति |access-date=7 दिसंबर 2015 |archive-url=https://web.archive.org/web/20150416162326/http://www.templesofindia.net/content/baba-baidyanath-temple-deoghar-jharkhand |archive-date=16 अप्रैल 2015 |url-status=dead }}</ref> पवित्र तीर्थ होने के कारण लोग इसे वैद्यनाथ धाम भी कहते हैं। जहाँ पर यह मन्दिर स्थित है उस स्थान को "देवघर" अर्थात् देवताओं का घर कहते हैं। बैद्यनाथ स्थित होने के कारण इस स्‍थान को देवघर नाम मिला है। यह एक सिद्धपीठ है। कहा जाता है कि यहाँ पर आने वालों की सारी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। इस कारण इस लिंग को "कामना लिंग" भी कहा जाता हैं। बैजनाथ अहिर ने सर्वप्रथम
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