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छत्रपति शाहूजी महाराज का जन्म 1682 में हुआ था। उनके बचपन का नाम यशवंतराव था। जब शाहूजी महाराज बालावस्था में थे तभी उनकी माता राधाबाई का निधन तब हो गया । उनके पिता का नाम श्रीमान जयसिंह राव अप्पा साहिब घटगे था। कोलहापुर के राजा शिवजी चतुर्थ की हत्या के पश्चात उनकी विधवा आनन्दीबाई ने उन्हें गोद ले लिया। शाहूजी महाराज को अल्पायु में ही कोल्हापुर की राजगद्दी का उतरदायित्व वहन करना पड़ा।
 
वर्ण-विधान के अनुसार शहूजी [[कुर्मि क्षत्रियशूद्र]] थे। वे बचपन से ही शिक्षा व कौशल में निपुर्ण थे। शिक्षा प्राप्ति के पश्चात् उन्होने भारत भ्रमण किया। यद्यपि वे कोल्हापुर के महाराज थे परन्तु इसके बावजूद उन्हें भी भारत भ्रमण के दौरान काफी सम्मान मिला। उन्होंने शुद्र और अछूतोजातिवाद के उद्धार का काफी प्रयास किया। वे अछूतोविष को हिंदू धर्मपीना की मुख्य धारा से जोडना चाहते थे।पड़ा। [[नासिक]], [[काशी]] व [[प्रयाग]] सभी स्थानों पर उन्हें रूढ़ीवादी ढोंगी ब्राम्हणो का सामना करना करना पड़ा। इसके बावजूदवे शाहूजी एकमहाराज धार्मिकको व्यक्तिकर्मकांड थे।के समाजलिए सुधारविवश कीकरना प्रेरणाचाहते उन्हेंथे आर्यपरंतु समाजशाहूजी सेने इंकार मिली।कर दिया।
 
समाज के एक वर्ग का दूसरे वर्ग के द्वारा जाति के आधार पर किया जा रहा अत्याचार को देख शाहूजी महाराज ने न केवल इसका विरोध किया बल्कि दलित उद्धार योजनाए बनाकर उन्हें अमल में भी लाए। [[लन्दन]] में [[एडवर्ड सप्तम]] के राज्याभिषेक समारोह के पश्चात् शाहूजी जब भारत वापस लौटे तब भी ब्राह्मणो ने धर्म के आधार पर विभिन्न आरोप उन पर लगाए और यह प्रचारित किया गया की समुद्र पार किया है और वे अपवित्र हो गए है।{{citation needed}}