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{{Infobox Ethnic group|group=सूर्यवंशी/नागवंशी क्षत्रिय कोली, कोल्ही एंव [[कोलिय]]|flag=[[File:Statue of Maharaja Yashwantrao Martandrao Mukne of Jawhar State.jpg|thumb|]]|flag_caption=[[महाराजा]] [[यशवंत राव मुकने|यशवंत राव मार्तण्ड राव मुकणे]], [[जव्हार रियासत]] के अंतिम कोली शासक 1948 तक|image=[[File:Samadhi Of Tanaji Malusare.jpg|thumb|]]|image_caption=[[तानाजी मालुसरे|देशमुख साहेब सरदार तानाजी राव कालोजी राव मालूसरे]], [[महाबलेश्वर]] राजबाड़ा के कोली देशमुख और [[मराठा सेना]] के कोली [[सेनापति]] जिसने [[सिंहगढ़ का युद्ध]] जीता था|regions=[[हरियाणा]], [[पंजाब]], [[दिल्ली]], [[राजस्थान]], [[सिंध]], [[गुजरात]], [[महाराष्ट्र]], [[कर्नाटक]]|languages=[[हिंदी]], [[गुजराती]], [[सिंधी]], [[कन्नड़]], [[मराठी भाषा]]|religions=[[हिन्दू]]}}
'''कोली''' एक समुदाय है जो मूल रूप से भारत के [[गुजरात]], [[राजस्थान]], [[मध्य प्रदेश]], [[महाराष्ट्र]], [[हरियाणा]], [[हिमाचल प्रदेश]], [[उत्तर प्रदेश]], [[कर्नाटक]] और [[जम्मू और कश्मीर|जम्मू कश्मीर]] राज्यों का निवासी रहा है।<ref>{{Cite web|url=http://www.newindianexpress.com/nation/2019/jan/27/jammu-and-kashmir-bjp-in-favour-of-reservation-for-people-living-along-international-border-1930747.html|title=Jammu and Kashmir BJP in favour of reservation for people living along international border|website=The New Indian Express|access-date=2019-10-03|archive-url=https://web.archive.org/web/20190408013847/http://www.newindianexpress.com/nation/2019/jan/27/jammu-and-kashmir-bjp-in-favour-of-reservation-for-people-living-along-international-border-1930747.html|archive-date=8 अप्रैल 2019|url-status=live}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/bengaluru/koli-community-hopeful-of-getting-st-tag-in-karnataka/articleshow/59305521.cms|title=presidential election 2017: Koli community hopeful of getting ST tag in Karnataka {{!}} Bengaluru News - Times of India|last=Jun 25|first=Naheed Ataulla {{!}} Updated:|last2=2017|website=The Times of India|language=en|access-date=2019-10-03|last3=Ist|first3=6:58|archive-url=https://web.archive.org/web/20190508073617/https://timesofindia.indiatimes.com/city/bengaluru/koli-community-hopeful-of-getting-st-tag-in-karnataka/articleshow/59305521.cms|archive-date=8 मई 2019|url-status=live}}</ref> कोली गुजरात की एक क्षत्रिय राजपूत/ठाकोर[[जमींदार|जमीदार]] जाती है वर्तमान में इनका मुख्य कार्य [[खेती-बाड़ी|खेतीबाड़ी]] है लेकिन जहां पर ये समुंद्री इलाकों में रहते हैं वहां पर खेतीबाड़ी काम करते हैं। [[बीसवीं शताब्दी]] की शुरुआत में [[अंग्रेजी शासन|अंग्रेजी]] हुकूमत ने इनको खूनी जाती घोषित कर दिया था।<ref name=":3" /> प्रथम विश्व युद्ध के दौरान अंग्रेजी हुकूमत ने कोली जाती को एक योद्धा जाती का दर्जा दिया क्योंकि कोली जाती ने प्रथम विश्व युद्ध में अपने वीरता का परिचय दिया।<ref name=":4">{{Cite book|url=https://books.google.co.in/books?id=HbAjKR_iHogC&source=gbs_navlinks_s|title=Caste, Society and Politics in India from the Eighteenth Century to the Modern Age|last=Bayly|first=Susan|date=2001-02-22|publisher=Cambridge University Press|isbn=978-0-521-79842-6|language=en|access-date=16 अप्रैल 2020|archive-url=https://web.archive.org/web/20160328172842/https://books.google.co.in/books?id=HbAjKR_iHogC&source=gbs_navlinks_s|archive-date=28 मार्च 2016|url-status=live}}</ref>
[[File:Manaji Angre II 01.jpg|thumb|महरवान श्रीमंत [[सरदार]] सरखेल माणाजी राजे आंग्रे, [[कुलाबा|कोलाबा]] [[रियासत]]|पाठ=]]
 
== क्षत्रीय कोली समाज इतिहास ==
 
== पोरबंदर के हरकांतभाई राजपारा ने यह लेख 'कोली समाज का परिचय' नामक दो पुस्तकों के आधार पर प्रस्तुत किया है, जो 'कोली समुदाय का ऐतिहासिक परिचय' और साथ ही 'दक्षिण गुजरात में कोली का अध्ययन' नामक एक शक्तिशाली पुस्तक है।  पुस्तकों में कोली जाति को "कोली क्षत्रिय" कहा गया है। ==
 
== जैसा कि उपरोक्त संदर्भ में उल्लेख किया गया है, कोली सूर्यवंशी क्षत्रिय हैं।  इक्ष्वाकु वंश के युवनाश्व के पुत्र मंधाता और कोली को भी इसी मान्धाता के वंशज कहा जाता है। ==
 
== कोलिक शब्द की उत्पत्ति ==
 
== (१) काठियावाड़ सर्वसंग्रह के अनुसार, "कोली" शब्द की उत्पत्ति का निर्धारण करना कठिन है। ==
 
== (२) फोर्ब्स रसमाला के अनुसार, "कोली" शब्द "कोली" नाम से आया है। ==
 
== (२) डॉ. विल्सन के अनुसार, "कुली" को ऊपर से कोली कहा जाता है। ==
 
== (२) कोली शब्द विंध्य के दक्षिण में वासी कोल जाति से आया है। ==
 
== (२) कुछ विद्वानों के अनुसार कोली शब्द "कुल" शब्द से बना है। ==
 
== (२) कुछ विद्वानों के अनुसार "कोर" शब्द का अर्थ "कोली" है। ==
 
== (२) मुंबई क्षेत्र के राजपत्र (१९०१-६) का अर्थ है "मछली पकड़ना"। ==
 
== (२) सार्थ स्पेलिंग सेल में तीन अर्थ दिखाए गए हैं। ==
 
== (ए) ठकरदा जाति (बी) ठकारडो (सी) शब्द "कोलन" एक काले आदमी और एक कोली महिला के लिए प्रयोग किया जाता है। ==
 
== कोली समुदाय के लिए पहचान के कुछ लोकप्रिय शब्द जैसे नाविक, निषाद, नाविक, नाविक, मछुआरे, मछुआरे आदि व्यवसाय या व्यवसाय से संबंधित भाषण हैं। ==
 
== कपिल वास्तु नेपाल में रोहिणी नदी के तट पर बसा एक शहर था।  नदी के विपरीत तट पर कोली समुदाय की आबादी वाला रामग्राम नामक एक गाँव था। ==
 
== एक पौराणिक कथा के अनुसार काशीनगरी के एक महाराजा का नाम "कोली" था।  यह राजकुमार घोर तपस्या करके "राजर्षि कोली" के नाम से प्रसिद्ध हुआ।  उस समय एक शाक्य कुमारी कुष्ठ रोग से पीड़ित थी।  एक जंगली बाघ ने गुफा का द्वार खोला और वहां योगनु योग "राजर्षि कोली" आया जिसने लड़की को बाघ से बचाया और उसे अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया।  कालांतर में कन्या के गर्भ में 12 पुत्रों का जन्म हुआ जिन्हें पुत्रों की माता ने कपिल वास्तु में मामा और नाना के पास भेजा था।  यहां शाक्य ने इन भतीजों को 15 ग्राम देकर कपिलवस्तु का नागरिक बनाया।  इन 12 लड़कों के वंश को "कोलियावंश" कहा जाता है। ==
 
== भगवान बुद्ध से कोली का संबंध उस समय का है जब बौद्ध धर्मग्रंथों के अनुसार बुद्ध की माता माया देवी और पत्नी यशोधरा कोली समुदाय की महिलाएं थीं।  कोली का उपनाम व्याघ्रपद है। ==
 
== बौद्ध शास्त्रों के अनुसार राजा ओपुर की वंशावली में ओपुर के पुत्र निपुर, निपुर के करंदक, करंदक के उल्कामुख, उल्कामुख के हस्तिक शीर्ष, हस्तिक शीर्ष के सिंहद के चार पुत्र और एक पुत्री थी।  संस (१) शुद्धोदन, (२) द्योतोदन (३) शुलकोडन, (४) अमृतोदन और कन्या - अभिता। ==
 
== उन्होंने सुमति नाम की एक शाक्य कोलियावंश लड़की से शादी की और उनकी बेटी मायादेवी कपिलवस्तु के राजा शुद्धोदन की रानी माया थी।  शाक्य राजा सुमति कपिलवस्तु के निकट देवदहनगर के शासक थे।  मायादेवी की अन्य 6 बहनों में सबसे छोटे महाप्रजापति उर्फ ​​गौतमी का विवाह भी राजा शुद्धोदन से हुआ था और राजा शुद्धोदन और कोली वंश की पत्नी मायादेवी के गर्भ से एक पुत्र सिद्धार्थ यानी भगवान बुद्ध का जन्म हुआ था।  इस प्रकार बुद्ध के मोसल को "कोली" कहा जाता है। ==
 
== प्राचीन काल में कोलिया समाज एक संगठित प्रभावशाली गणतंत्र राज्य था।  कोली क्षत्रिय उन राज्यों के राजा थे।  रामग्राम, देवदह, उत्तरकल्प, हसीदावासन, संजनेल, सपुत्र, कक्कड़ पाटन आदि राज्यों में कोली-क्षत्रियों के झंडे लहरा रहे थे।  अपनी वसीयत में, भगवान बुद्ध ने अपने निर्वाण के बाद, कोली समुदाय को एक स्मारक के लिए हड्डी का आठवां हिस्सा दिया, और उस आदेश के अनुसार, उन्होंने उपरसांची का एक स्तूप बनाया, जो उन्हें बुद्ध के निर्वाण के बाद मिला था। ==
 
== दरअसल, जब बुद्ध ने कुशीनगर में निर्वाण प्राप्त किया, तो उनकी हड्डियों के लिए झगड़ा हुआ और कोली क्षत्रियों ने मल्लराष्ट्र पर आक्रमण किया।  ये कोली शासक अजात शत्रु, मल्लराज या लिच्छवी से नहीं डरते थे।  इसके अलावा, बुद्ध, जिन्होंने रोहिणी नदी के पानी के लिए शाक्य और कोलियों के बीच झगड़ा किया था, उपदेश देकर शांत हो गए थे। ==
 
== कोली राजवी ने अंजन से पहले "कदज संवत" पर शोध किया। "अंजन संवत"  21 चैत्र मास ईसा पूर्व से शुरू हुआ।  यह अंजन संवत बर्मा के बौद्ध धर्मग्रंथों और पाली साहित्य में बहुत महत्वपूर्ण है। ==
 
== महाराष्ट्र में कोली समुदाय के अनुसार महर्षि वाल्मीकि एक कोली थे।  महाराष्ट्र में बरार प्रांत - पुण्यगंगा नदी के उत्तरी तट पर, अमरावती के पास, दरियापुर जिले में कसमपुर नामक एक गाँव है जहाँ एक वाल्मीकि मठ है जिसे कोली मठ कहा जाता है।  उनके महंत कोली समाज के बाल ब्रह्मचारी हैं। ==
 
== राम को सरयू और श्रींतवेरपुर के राजा के घर में ले जाने वाला नाविक भी इसी कोली समुदाय का था।  शबरी भील का एक उदाहरण भी है। ==
 
== महाभारत काल की बात करें तो महर्षि वेद व्यास एक मछुआरे की पुत्री मत्स्यगंधा के पुत्र थे।  इसके अलावा, एकलव्य, जो भील जाति के हैं, ने गुरुदक्षिणा में द्रोण से उनका अंगूठा मांगा था। ==
 
== बुद्ध द्वारा सुधारे गए अंगुलिमाल लुटेरे भी इसी समाज के थे। ==
 
== 2000 से 2000 ईसा पूर्व तक "मोहन-जो-दड़ो" के अवशेषों में कोली वंश का उल्लेख है। ==
 
== बुद्ध की पत्नी यशोधरा बिंबा (मुंबा) कोली की देवी हैं और मुंबई में रहती हैं, जिससे मुंबई मुंबई बन गई। ==
 
== रामायण के किष्किंधा कांड में 'कोलिक' शब्द और पंचतंत्र आदि में 'कौलिक' शब्द कोली का वाचक है। ==
 
== इतिहास प्रसिद्ध चंद्रगुप्त मौर्य भी इसी समाज का हिस्सा थे।  इक्ष्वाकु वंश की ६ जातियाँ इस प्रकार थीं- (१) मल्ल (२) जनक (३) विदेह (४) कोलिया (४) मौर्य (४) लिच्छवि (५) जनत्री (५) वज्जी (५) शाक्य।  इन जातियों के बीच पारिवारिक संबंध थे।  शत्रु के आक्रमण के कारण कुछ शाक्य हिमालय के उजाड़ क्षेत्र में बस गए और नवुननगर मयूरनगर विकसित किया इसलिए इसका नाम मौर्य पड़ा।  और जहाँ नगर बना था, वहाँ अधिक खिले थे।  इसलिए वहां के लोग मौर्य कहलाते थे।  'मुरा' नाम की लड़की से उत्पन्न मौर्य भी विभिन्न किंवदंतियों में पाए जाते हैं। ==
 
== इस कोली जाति का अस्तित्व और विवरण हरिवंश, मत्स्य पुराण, मार्कंडेय पुराण, वायुपुराण, महाभारत सभापर्व, अश्वमेघपर्व आदि में देखा जा सकता है। ==
 
== उदा.  मत्स्य पुराण अध्याय 114 (2) के अनुसार। ==
 
== "शूरासे का भद्राकार वाह्य सहपचचर २. ==
 
== मत्स्य: किरात: कुल्यश्च, कुंतला: काशी कौशल: .. <nowiki>''</nowiki> ==
 
== और इस स्थान का वर्णन श्लोक ३, ४, ५ में इस प्रकार किया गया है। ==
 
== "तेशा से परे जनपद दक्षिणापथ वासिन। ==
 
== पांड्यश्च केरलाशचैव, चोल: कुल्यस्तैवच। ==
 
== और कुलियाश्च सिरालाश रूपसस्ता पासे: सह। ==
 
== और तैतिरीकाशचैव, सर्वे करस्कर स्तथा। ==
 
== इस प्रकार, जैसा कि ऊपर वर्णित है, पुराणों में कितनी बार कोली जाति का उल्लेख है।  दक्षिणी भाषाओं में, 'क' 'च' का भ्रष्टाचार है, जिसका अर्थ है 'चोल', 'चा' और 'चोली' कोली शब्द का एक ही रूप है।  पंजाब में इस जाति के लिए 'कूलर' शब्द मिलता है।  पौराणिक शब्द 'कालीवाला' या 'कोलवन' कोली के निवास वाले क्षेत्र के लिए है।  तिब्बती भाषा में 'क्रोदत्या' या 'कोडे' शब्द प्रचलित है।  जिसे गुजराती, मराठी या राजस्थानी में "कोली" कहा जाता है, उसे यूपी में "कोरी", भरतपुर की ओर "कोरिया", बंगाल-बिहार में "कोईरी" कहा जाता है।  शब्द प्रचलित हैं।  इस विश्वास के विपरीत कि संत श्री कबीर साहब एक ब्राह्मण महिला या मुस्लिम बुनकर के पुत्र थे, उनकी कुछ "पुनरावृत्ति" में "कहत कबीर कोरी" के रूप में खुद को कोली के रूप में वर्णित करने के लिए एक विशेष शोध की गुंजाइश है। ==
 
== चीनी यात्री लियू-एन-संग ने कोली को "किलियोटा" के रूप में वर्णित किया।  कुल्लू का राजा भी एक कोली था।  इस प्रकार कोली 'कुल्फ' प्रांत की सबसे प्राचीन प्रजाति है।  कुल्या, कुलिया, कोलिया, कोली कोन, (छोड़, चोल, चोल, ओलिया, चुलिया) कुलुत, कुरुत, कुल्लू, कुलिंद, कौलिंड आदि। 'कोली' शब्द भारत में विभिन्न स्थानों पर पाया जाता है।  हरिवंश के अनुसार महाराजा सागर के समय में भी अन्य जातियों जैसे शक, यवन, कम्बोज, पारद, सर्प, महिष, दरद, केरल, खास, तलजंघो आदि में कोली जाति की उपस्थिति देखी जाती थी।  एक साथ रेखांकित मिला।  सागर भगवान राम से पहले कितनी पीढ़ियाँ इस प्रकार कोली समाज क्षत्रिय जाति का ही था।  मकड़ियों की एक उप-प्रजाति है, अहिरवार।  इसके अनुसार कोली नागजाति भी मानी जाती है। ==
पंद्रहवीं सतावदी के लेखों के अनुसार कोली जागीरदार खासकर गुजरात सल्तनत में लूट पाट करते थे। लेखिका सुसान बेबी के अनुसार कोली जाती [[महाराष्ट्र]] की एक पुरानी [[क्षत्रिय]] जाती है। सन् 1940 तक तो [[गुजरात]] और महाराष्ट्र के सभी [[राजा]] और [[महाराजा]] कोली जाती को एक बदमाश जाती के रूप में देखते आए थे जिसके कारण वो अपनी सैन्य शक्ति बनाए रखने के लिए कोली जाती को सैनिकों के तौर पर रखते थे। ज्यादातर कोली [[ज़मींदारी प्रथा|जमींदारी]] में व्यस्त हो गए लेकिन कुछ कोली व्यवास करने लगे। इस्लामिक भारत के समय से ही कोली जाती अपना महत्व बनाए हुए है। गुजरात में मुस्लिम शासन के समय कोली जाती जागीरदार के तौर पर और गीरासिया के तौर पर बनी हुई है। जागीरदार कोली अपने आप को [[ठाकुर|ठाकोर]] बोलते थे यानी की जागीरदार।<ref name=":4" />