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अपने राष्ट्र और देश और मोहम्मद साहब के पारिवारिक लोगों ने इनसे शरण मांगी इन्होंने उनको शरण दी और अरब में खलीफा शासन लागू हो गया था और खलीफा मोहम्मद साहब के वारिस को और सभी पारिवारिक लोगों को मारना चाहता था जब खलीफा को मालूम चला की दाहिर सेन ने मोहम्मद साहब के नवासों को शरण दी है तो खलीफा ने जनरल हज्जाज को फौजी दस्ते के साथ भेजा और राजा दाहिर सेन ने उसको मार के भगा दिया।फिर अरब के खलीफा ने मोहम्मद बिन कासिम को भेजा।
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(अपने राष्ट्र और देश और मोहम्मद साहब के पारिवारिक लोगों ने इनसे शरण मांगी इन्होंने उनको शरण दी और अरब में खलीफा शासन लागू हो गया था और खलीफा मोहम्मद साहब के वारिस को और सभी पारिवारिक लोगों को मारना चाहता था जब खलीफा को मालूम चला की दाहिर सेन ने मोहम्मद साहब के नवासों को शरण दी है तो खलीफा ने जनरल हज्जाज को फौजी दस्ते के साथ भेजा और राजा दाहिर सेन ने उसको मार के भगा दिया।फिर अरब के खलीफा ने मोहम्मद बिन कासिम को भेजा।)
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'''राजा दाहिर''' [[सिंध]] के अंतिम हिंदू राजा थे।<ref>{{cite web|title=राजा दाहिर: सिंध पर हुकूमत करने वाला आख़िरी कश्मीरी पंडित|url=https://www.bbc.com/hindi/international-48904548}}</ref> उनके समय में ही अरबों ने सर्वप्रथम सन ७१२ में भारत (सिंध) पर आक्रमण किया था। [[मुहम्मद बिन क़ासिम]] मिशन 712 में सिंध पर आक्रमण किया था जहां पर राजा दहिर सैन ने उन्हें रोका और उनके साथ युद्ध लड़ा उनका शासन काल 663 से 712 ईसवी तक रहा उन्होंने अपने शासनकाल में अपने सिंध प्रांत को बहुत ही मजबूत बनाया परंतु अपने राष्ट्र और देश और मोहम्मद साहब के पारिवारिक लोगों ने इनसे शरण मांगी इन्होंने उनको शरण दी और अरब में खलीफा शासन लागू हो गया था और खलीफा मोहम्मद साहब के वारिस को और सभी पारिवारिक लोगों को मारना चाहता था जब खलीफा को मालूम चला की रक्षादाहिर सेन ने मोहम्मद साहब के लिएनवासों को शरण दी है तो खलीफा ने जनरल हज्जाज को फौजी दस्ते के साथ भेजा और राजा दाहिर सेन ने उसको मार के भगा दिया।फिर अरब के खलीफा ने मोहम्मद बिन कासिम को भेजा और कासिम को मालूम था की इनसे ऐसे जितना मुस्किल है जिसके कारण कासिम ने इनके एक सिपहसालार को दाहिर को मारने के बाद उसे गद्दी पर बैठाने का ख्वाब दिखाया जिससे उस सिपहसालार ने राज दाहिर सेन के साथ गद्दारी की इस कारण इनको हार का मुंह देखना उन्होंनेपड़ा। उम्मेद शासन के जनरल मोहम्मद बिन कासिम की लड़ाई लड़ी और परंतु हार गए 712 में उनका सिंधु नदी के किनारे उनकी मौत हो गयी।<ref>{{cite web|url=https://www.dawn.com/news/1617739/situationer-nine-trenches-into-the-past-of-sindh|title=SITUATIONER: Nine trenches into the past of Sindh}}</ref>
 
इनके पुत्र [[जय सिंह दहिर]] भी 712 मे मारे गये।