"शिरडी साईं बाबा" के अवतरणों में अंतर

*साईं ट्रस्ट के द्वारा 96 करोड़ मस्जिद के लिए दान।* *लेकिन राम मंदिर निर्माण के लिए 1रूपया नहीं दिया गया।* *अब भी नहीं समझे मुर्खों तो अफगान का हाल देख लो।* *तुम्हारे ही चढ़ावा के धन से* *मस्जिद बन रहें हैं, आतंकवादी पल रहे हैं और तुम्हारा सर्वनाश कर रहे हैं।* *वाह रे साईं तेरा षड़यंत्र, हिन्दू भूल रहे वैदिक मंत्र।* *और हम मुर्ख हिंदू साई के मंदिर में जाकर माथा टेकते हैं और चढ़ावा चढ़ाते है*साईं बाबा की सच्चाई सभी सनातन धर्मियों को जाना चाहिए । किस तरह से साजिश के तहत हिंदू मंदिरों में साईं...
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(*साईं ट्रस्ट के द्वारा 96 करोड़ मस्जिद के लिए दान।* *लेकिन राम मंदिर निर्माण के लिए 1रूपया नहीं दिया गया।* *अब भी नहीं समझे मुर्खों तो अफगान का हाल देख लो।* *तुम्हारे ही चढ़ावा के धन से* *मस्जिद बन रहें हैं, आतंकवादी पल रहे हैं और तुम्हारा सर्वनाश कर रहे हैं।* *वाह रे साईं तेरा षड़यंत्र, हिन्दू भूल रहे वैदिक मंत्र।* *और हम मुर्ख हिंदू साई के मंदिर में जाकर माथा टेकते हैं और चढ़ावा चढ़ाते है*साईं बाबा की सच्चाई सभी सनातन धर्मियों को जाना चाहिए । किस तरह से साजिश के तहत हिंदू मंदिरों में साईं...)
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{{Infobox Hinduhindu leader
| name = शिरडी साईं बाबा
| image = Shirdi Sai Baba 3.jpg
| title =Religion: islam
| alt = शिरडी साईं बाबा
| caption = शिरडी साईं बाबा का चित्र
| death_date = {{Death date|df=yes|1918|10|15}}<ref>{{cite news|title=Shirdi Sai Baba's 97th death anniversary: The one who was revered by all|url=http://indiatoday.intoday.in/education/story/sai-baba/1/499307.html|accessdate=19 November 2017|work=[[इण्डिया टुडे|इंडिया टुडे]]|date=15 October 2015|url-status=live|archiveurl=https://web.archive.org/web/20170531174518/http://indiatoday.intoday.in/education/story/sai-baba/1/499307.html|archivedate=31 May 2017|df=dmy-all}}</ref>
| death_place = [[शिरडी]], [[बंबई प्रेसीडेंसी]], [[ब्रिटिश राज|ब्रितानी भारत]] वर्तमान में [[महाराष्ट्र]], [[भारत]])
| resting_place = Samadhi MandirMajar, Shirdi
| philosophy = [[भक्ति योग]], [[सूफ़ीवाद]], [[ज्ञान योग]], [[कर्म योग]]
| disciples = Mahalsapathi, Madhav Rao (shama), Nanasaheb peshway, Bayijabai, Tatya Kote Patil, Kakasaheb Dixit, Radhakrishnamaai, Hemadpant, Bhuti, Das Ganu, Lakshmi Bai, Nanavali, Upasni Maharaj, Abdul Baba, Sapatanekar, Nanasaheb Chandodkar, B.V. Narashima Swamiji
[[श्रेणी:१९१८ में निधन]]
[[श्रेणी:महाराष्ट्र के लोग]]
 
 
*साईं ट्रस्ट के द्वारा 96 करोड़ मस्जिद के लिए दान।*
*लेकिन राम मंदिर निर्माण के लिए 1रूपया नहीं दिया गया।*
 
*अब भी नहीं समझे मुर्खों तो अफगान का हाल देख लो।*
*तुम्हारे ही चढ़ावा के धन से* *मस्जिद बन रहें हैं, आतंकवादी पल रहे हैं और तुम्हारा सर्वनाश कर रहे हैं।*
सच्चाई सभी सनातन धर्मियों को जाना चाहिए । किस तरह से साजिश के तहत हिंदू मंदिरों में साईं की मूर्तियां बैठाई जा रही है सावधान हो जाओ हिंदुओं और सच्चाई जानने का प्रयास करो । उसके पुस्तक साई सत्चरित्र से_
 
विवेक दर्शन पत्रिका
 
आप भी जान लीजिए साई की चाले , चेहरा, चरित्र और मजहब
 
अध्याय 4, 5, 7 - साईं बाबा के होंठो पर सदैव "अल्लाह मालिक" रहता था,
साईं मस्जिद मैं रहता था अध्याय- 1, 3, 4, 7, 8, 9, 11, 13
साईं बकरे हलाल करता था ... अध्याय- 5, 11, 14, 23, 28, 50
अध्याय 5 - साईं बाबा ने दियो में थूक कर दिए जलाए,
अध्याय 7 - साईं बाबा फकीरों के साथ आमिष और मछली का भी सेवन कर लेते थे,
अध्याय 11 - साईं बाबा ने पूछा की हाजी से पूछो की उसे बकरे का गोश्त पसंद है या नाध या अंडकोष
अध्याय 11, 28 - साईं बाबा खाने के समय फातिहा कुरान पढ़ते थे
अध्याय 5, 14, 50 - साईं बाबा बीडी चिलम पीते थे और अपने भक्तो को भी पीने के लिए देते थे, जिस कारण उन्हें दमा था,
अध्याय 18, 19 - इस मस्जिद में बैठ कर मैं सत्य ही बोलुगा की किन्ही साधनाओ या शास्त्रों के अध्ययन की आवश्यकता नहीं है,
अध्याय 10- न्याय या दर्शन शास्त्र या मीमांसा पढने की आवश्यकता नहीं है,
अध्याय 23 - प्राणायाम, श्वासोंचछवासम हठयोग या अन्य कठिन साधनाओ की आवश्यकता नहीं है,
अध्याय 28 - चावडी का जुलुस देखने के दिन साईं बाबा कफ से अधिक पीड़ित थे,
अध्याय 43, 44 - 1886 मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन साईं बाबा को दमा से अधिक पीड़ा हुई,
अध्याय 43, 44 - साईं बाबा ने खुद को पास वाले मंदिर में इस्लामिक रीती रिवाज से पूजने की बात कही थी, जिसके बाद मंदिर में ही गड्ढा खोद कर उन्हें वहां दफना दिया गया था,
एक एकादशी के दिन उन्होने केलकर को कुछ रूपये देकर कुछ मास खरीद कर लाने को कहा (अध्याय38)
एसे ही एक अवसर पर उन्होने दादा से कहा,देखो तो नमकीन बिरयानी पुलाव कैसा पका है?दादा ने यो ही कह दिया कि अच्छा है।तव वे कहने लगे तुमने न अपनी आखो देखा न जीव से स्वाद लिया,फिर तुमने कैसे कह दिया अच्छा बना है?
अध्याय 38 - मस्जिद से बर्तन मंगवाकर वे "मौलवी से फातिहा" पढने के लिए कहते थे,
 
मित्रो, आज तक मैंने जितने भी साईं मंदिर देखे है उन सभी में साईं की मुर्तिया बहुत ही सुन्दर और मनमोहक होती है,
असल में एक पूरी योजना के साथ झूठ का प्रचार करके साईं को मंदिरों में बिठाने का षड्यंत्र 1992 में श्री रामजन्मभूमि के बाद शुरू हुआ, जिसका उद्देश्य था राम के नाम पर उग्र हो चुके हिन्दुओ के जोश को ठंडा करके एक ऐसा विकल्प देना जिसके पीछे भाग कर हिन्दू राम को भूल जाए,
आज जितने देश में राम मंदिर है उतने ही साईं के मस्जिद रूपी मंदिर बन चुके है, हर राम मंदिर में राम जी के साथ साईं नाम का अधर्म बैठा हुआ है,
 
अधिकतर साईं के मंदिर 1998 के बाद ही बने है तब इस्लामिक संगठनो द्वारा साईं के प्रचार के लिए बहुत अधिक धन लगाया गया,
 
साईं के सुन्दर सुन्दर भजन, गाने, मूर्तियाँ, झूठी कहानियां बनाई गयी, कुछ कहानियां साईं सत्चरित्र से मेल खाती है जैसे की दिवाली पर दिए जलाने की घटना जो असल में साईं ने दियो में थूक कर जलाये थे,
 
ऐसी ही बहुत सी घटनाओं को तोड़ मरोड़ कर पेश किया और हिन्दुओ में सेकुलरिज्म का बीज साईं के रूप में अंकुरित किया गया,
 
यदि किसी को ये झूठ लगे तो स्वयं ही वो शोध कर ले,
 
साईं की ये असली मूर्ति आप देख रहे है जिसमे साईं एक मुस्लिम और पूरी तरह से केवल एक मुस्लिम ही दिख रहा है जिसमे सनातन धर्म का अंश मात्र भी नहीं दिख रहा है,