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साई बाबा भारतीय फकीर है जो सर्वमान्य है।
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'''साईंबाबा''' (जन्म:२८ सितंबर १८३५ <ref name="गुप्त">''शिरडी साईं बाबा : दिव्य महिमा'', गणपति चन्द्र गुप्त, लोकभारती प्रकाशन, इलाहाबाद, तृतीय (पेपरबैक) संस्करण-2011, पृष्ठ-12.</ref>, मृत्यु: १५ अक्टूबर १९१८)<ref>{{cite book |last1=Ruhela |first1=Satya Pal |title=The Spiritual Philosophy Of Shri Shirdi Sai Baba |date=1998 |publisher=Diamond Pocket Books (P) Ltd. |isbn=9788171820900 |url=https://books.google.co.in/books?id=AN352ZpSMVYC&printsec=frontcover&dq=shirdi+sai+baba+birth&hl=en&sa=X&ved=0ahUKEwjZ3IeB8YTcAhUJQ48KHccoAPAQ6AEIPDAE#v=onepage&q=shirdi%20sai%20baba%20birth&f=false |accessdate=4 जुलाई 2018 |language=en |archive-url=https://web.archive.org/web/20180704095311/https://books.google.co.in/books?id=AN352ZpSMVYC&printsec=frontcover&dq=shirdi+sai+baba+birth&hl=en&sa=X&ved=0ahUKEwjZ3IeB8YTcAhUJQ48KHccoAPAQ6AEIPDAE#v=onepage&q=shirdi%20sai%20baba%20birth&f=false |archive-date=4 जुलाई 2018 |url-status=live }}</ref> जिन्हें '''शिरडी साईंबाबा''' भी कहा जाता है, एक [[भारतीय]] [[गुरु]], [[संत]] एवं [[फ़क़ीर]] के रूप में बहुमान्य हैं। उनके अनुयायी उन्हें सर्वशक्तिमान एवं सर्वव्यापी मानते हैं।<ref name="गुप्त2">''शिरडी साईं बाबा : दिव्य महिमा'', गणपति चन्द्र गुप्त, लोकभारती प्रकाशन, इलाहाबाद, तृतीय (पेपरबैक) संस्करण-2011, पृष्ठ-17 एवं 127-131.</ref>
 
== जीवन-परिचय ==