"प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय": अवतरणों में अंतर

(जानकारी और संदर्भ)
 
== स्थापना ==
इस संस्‍था की स्‍थापना [[दादा लेखराज|लेखराज]] जीकृपलानी ने की, जिन्‍हेंजिन्हें यह आज हमसंस्था प्रजापिता ब्रह्मा के नाम से जानतेमानती हैंहै।<ref name="Jīvana ko palaṭāne vālī eka adbhuta jīvana-kahānī 1973 p. ">{{cite book | title=Jīvana ko palaṭāne vālī eka adbhuta jīvana-kahānī | publisher=Prajāpitā Brahmākumārī Īśvarīya Viśva-Vidyālaya | series=Jīvana ko palaṭāne vālī eka adbhuta jīvana-kahānī | issue=v. 1 | year=1973 | url=http://books.google.co.in/books?id=VjohAAAAMAAJ | language=lv | accessdate=२८ मार्च २०२० | page=}}</ref>।
 
दादा लेखराज अविभाजित [[भारत]] में हीरों के व्‍यापारी थे। वे बाल्‍यकाल से ही धार्मिक प्रवृत्ति के थे। 60 वर्ष की आयु में उन्‍हें परमात्‍मा के सत्‍यस्‍वरूप को पहचानने की दिव्‍य अनुभूति हुई। उन्‍हें ईश्‍वर की सर्वोच्‍च सत्‍ता के प्रति खिंचाव महसूस हुआ। इसी काल में उन्‍हें ज्‍योति स्‍वरूप निराकार परमपिता शिव का साक्षात्‍कार हुआ। इसके बाद धीरे-धीरे उनका मन मानव कल्‍याण की ओर प्रवृत्‍त होने लगा।
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