"सांवरिया जी मंदिर" के अवतरणों में अंतर

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किंवदंती यह है कि वर्ष 1840 में, भोलाराम गुर्जर नाम के एक दूधवाले ने भादसोड़ा-बगुंड के चापर गांव में तीन दिव्य मूर्तियों को भूमिगत दफनाने का सपना देखा था; साइट को खोदने पर, भगवान कृष्ण की तीन सुंदर मूर्तियों की खोज की गई, जैसा कि सपने में दिखाया गया था। मूर्तियों में से एक को मंडाफिया ले जाया गया, एक को भादसोड़ा और तीसरा चपर में, उसी स्थान पर जहां यह पाया गया था। तीनों स्थान मंदिर बन गए। ये तीनों मंदिर 5 किमी की दूरी के भीतर एक-दूसरे के करीब स्थित हैं। सांवलिया जी के तीन मंदिर प्रसिद्ध हुए और तब से बड़ी संख्या में भक्त उनके दर्शन करने आते हैं। इन तीन मंदिरों में मंडफिया मंदिर को सांवलिया जी धाम (सांवलिया का निवास) के रूप में मान्यता प्राप्त है।
 
 
वीरता और भक्ति की ऐतिहासिक नगरी चित्तौड़गढ़ रेलवे स्टेशन से 41किमी. व डबोक एयरपोर्ट से 65 किमी. पर स्थित मंडपिया अब श्री सांवलिया धाम (भगवान कृष्ण का निवास) के रूप में जाना जाता है और वैष्णव संप्रदाय के अनुयायियों के लिए श्री नाथद्वारा के बाद दूसरे स्थान पर है।<ref>{{Cite web|url=https://m.patrika.com/chittorgarh-news/sanwaliya-seth-temple-chittorgarh-rajasthan-2398436/|title=राजस्थान का अद्भुत मंदिर जहां लोग जितना चढ़ाते हैं उससे कई गुणा ज्यादा पाते हैं|last=dinesh|website=Patrika News|language=hi|access-date=2021-11-28}}</ref>
 
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वीरता और भक्ति की ऐतिहासिक नगरी चित्तौड़गढ़ रेलवे स्टेशन से 41किमी. व डबोक एयरपोर्ट से 65 किमी. पर स्थित मंडपिया अब श्री सांवलिया धाम (भगवान कृष्ण का निवास) के रूप में जाना जाता है और वैष्णव संप्रदाय के अनुयायियों के लिए श्री नाथद्वारा के बाद दूसरे स्थान पर है।<ref>{{Cite web|url=https://m.patrika.com/chittorgarh-news/sanwaliya-seth-temple-chittorgarh-rajasthan-2398436/|title=राजस्थान का अद्भुत मंदिर जहां लोग जितना चढ़ाते हैं उससे कई गुणा ज्यादा पाते हैं|last=dinesh|website=Patrika News|language=hi|access-date=2021-11-28}}</ref> {{निर्माणाधीन}}
==संदर्भ==
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