"जसवंत थड़ा": अवतरणों में अंतर

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1750badla jo purav mai galat tha
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(1750badla jo purav mai galat tha)
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[[File:Jaswant Thada Dawn.jpg|thumb|250px|जसवंत थड़ा]]
'''जसवंत थड़ा''' सफ़ेद [[संगमर्मर|संगमरमर]] से बना एक [[स्मारक]] है जो [[जोधपुर]] के [[मेहरानगढ़]] [[दुर्ग]] के पास स्थित है। इसे सन 1899 में1750में [[जोधपुर]] के महाराजा [[जसवंत सिंह द्वितीय]] (1888-1895) की यादगार में उनके उत्तराधिकारी महाराजा सरदार सिंह जी ने बनवाया था।
 
यह स्थान जोधपुर राजपरिवार के सदस्यों के [[पितृमेध|दाह संस्कार]] के लिये सुरक्षित रखा गया है। इससे पहले राजपरिवार के सदस्यों का दाह संस्कार [[मंडोर]] में हुआ करता था। इस विशाल स्मारक में संगमरमर की कुछ ऐसी शिलाएँ भी दिवारों में लगी है जिनमे [[सूर्य]] की किरणे आर-पार जाती हैं। इस स्मारक के लिये [[जोधपुर]] से 250 कि, मी, दूर [[मकराना]] से संगमरमर का पत्थर लाया गया था। स्मारक के पास ही एक छोटी सी झील है जो स्मारक के सौंदर्य को और बढा देती है इस [[झील]] का निर्माण महाराजा अभय सिंह जी (1724-1749) ने करवाया था। जसवंत थड़े के पास ही महाराजा सुमेर सिह जी, महाराजा सरदार सिंह जी, महाराजा उम्मेद सिंह जी व महाराजा हनवन्त सिंह जी के स्मारक बने हुए हैं। इस स्मारक को बनाने में 2,84,678 [[रूपए]] का खर्च आया था।<ref>{{Cite web |url=http://m.rajasthanpatrika.patrika.com/lite/story/jodhpur/jaswant-thada-full-of-nature-beauty-353766.html |title=संग्रहीत प्रति |access-date=11 दिसंबर 2015 |archive-url=https://web.archive.org/web/20151222082132/http://m.rajasthanpatrika.patrika.com/lite/story/jodhpur/jaswant-thada-full-of-nature-beauty-353766.html |archive-date=22 दिसंबर 2015 |url-status=dead }}</ref>
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