"सिद्ध साहित्य" के अवतरणों में अंतर

*(२) उपदेश परक साहित्य
*(३) साधना सम्बन्धी या रहस्यवादी साहित्य
सिद्धों की साधना धर्म का विकृत रूप थी, उन्होंने वामाचार फैलाया वह अपनी साधना के लिये स्त्री का प्रयोग आवश्यक मानते थे:-
उस समय बिहार व बंगाल में सास व ननंद द्वारा नई दुल्हन को सिद्धों के आकर्षण से सावधान रहने की शिक्षा दि जाती थी
इनके साहित्य को आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने सांप्रदायिक शिक्षा मात्र कहा जिनका बाद में हजारी प्रसाद द्विवेदी ने खंडन किया।।
 
==सिद्ध साहित्य की प्रमुख विशेषताएं==