"सिद्ध साहित्य" के अवतरणों में अंतर

*(३) साधना सम्बन्धी या रहस्यवादी साहित्य
== भाषा-शैली ==
सिद्धों की भाषा में 'उलटबासी' शैली का पूर्व रुप देखने को मिलता है। इनकी भाषा को संध्या भाषा कहा गया है।
साधना अवस्था से निकली सिद्धों की वाणी '[[चर्यापद|चरिया गीत / चर्यागीत]]' कहलाती है।
 
==सिद्ध साहित्य की प्रमुख विशेषताएं==