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[[गंगा नदी]] में होने वाला प्रदूषण पिछले कई सालों से भारतीय सरकार और जनता के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। इस नदी उत्तर [[भारत]] की सभ्यता और संस्कृति की सबसे मजबूत आधार है। उत्तर भारत के लगभग सभी प्रमुख शहर और उद्योग करोड़ों लोगों की श्रद्धा की आधार गंगा और उसकी सहायक नदियों के किनारे हैं और यही उसके लिए सबसे बड़ा अभिशाप साबित हो रहे हैं।
==प्रदूषण का कारण==
[[ऋषिकेश]] से लेकर [[कोलकाता]] तक गंगा के किनारे [[परमाणु बिजलीघर]] से लेकर [[रासायनिक खाद]] तक के कारख़ाने लगे हैं। [[कानपुर]] का जाजमऊ इलाक़ा अपने [[चमड़ा उद्योग]] के लिए मशहूर है। यहाँ तक आते-आते गंगा का पानी इतना गंदा हो जाता है कि उसमें डुबकी लगाना तो दूर, वहाँ खड़े होकर साँस तक नहीं ली जा सकती। गंगा की इसी दशा को देख कर मशहूर वकील और मैगसेसे पुरस्कार विजेता एमसी मेहता ने १९८५ में गंगा के किनारे लगे कारख़ानों और शहरों से निकलने वाली गंदगी को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी। फिर सरकार ने गंगा सफ़ाई का बीड़ा उठाया और [[गंगा एक्शन प्लान]] की शुरुआत हुई।<ref>{{cite web |url= http://sujalam.blogspot.com/2007/11/blog-post_3914.html|title=क्या गंगा बनेगी सदानीरा?|accessmonthday=[[३० जून]]|accessyear=[[२००९]]|format=|publisher=सुजलाम्|language=}}</ref>
माँ गंगा करे रो - रो कर करुण पुकार !
कहा गए मेरे तारणहार !!
प्रान्त की बड़ी - बड़ी सुगर मिल्स का स्क्रैप प्रत्येक वर्ष गंगा नदी मै विसर्जित किया जाना !
प्रशासन मूक दर्शक बनकर इस कुकृत्य को देख रहा है
क्या होगा ऐसे देश का जहा माँ असितत्व ही खतरे मै है
गंगा माँ का अब जन जन से है ये कहना
धुप नहीं अब छअव् भी दो, मेरी अस्मिता को कोई नयी पहचान भी दो
आओ यदि देश का असितत्व बनाये रखना है ,तो गंगा माँ को प्रदुषण से मुक्त करे !!!
 
<ref>{{cite web |url= http://sujalam.blogspot.com/2007/11/blog-post_3914.html|title=क्या गंगा बनेगी सदानीरा?|accessmonthday=[[३० जून]]|accessyear=[[२००९]]|format=|publisher=सुजलाम्|language=}}</ref>
 
==गंगा एक्शन प्लान==
बेनामी उपयोगकर्ता