"पतञ्जलि योगसूत्र": अवतरणों में अंतर

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इसमें पतंजलि योग सूत्रों के ४ खानो की जानकारी को जोड़ा है
छो (इसमें पतंजलि योग सूत्रों के ४ खानो की जानकारी को जोड़ा है)
* विभूति पाद (५५ सूत्र)
* कैवल्य पाद (३४ सूत्र)
::'''कुल सूत्र = १९५ ''' '''समाधी पाद'''- इस पुस्तक के इस खंड में योग शास्त्र का आरंभ और इसके लक्षण, चित् की व्रतियों के भेद और उसके लक्षण, चित्त की वृत्तियों का विरोध, समाधि का वर्णन, ईश्वर प्राणी धान का महत्व चित् के विक्षेप और उसको दूर करने के उपाय, मन को स्थिर करने के विभिन्न उपाय, समाधि के अन्य भेद एवं उनके विभिन्न प्रकार के फल बताए गए हैं।
::'''कुल सूत्र = १९५ '''
:'''साधन पाद'''-साधन पाद खंड में क्रिया रोग का स्वरूप और उसके अनेक फल अविद्या इत्यादि प्रकार के पांच क्लेश क्लेश ओं के नाश का उपाय दृश्य और दृष्टा का स्वरूप प्रकृति एवं पुरुष का मिलन योग के आठ अंगों का वर्णन किया गया है।
:'''विभूति पाद'''- पुस्तक के इस खंड में धारणा ध्यान समाधि का वर्णन संयम का निरूपण मन के परिणामों का विषय प्रकृति दैनिक पदार्थों के विभिन्न परिणाम निम्न विषयों में संयम करने के अनेकों परिणाम विवेक ज्ञान और केवल ले के बारे में चर्चा की गई है
:'''कैवल्य पाद'''- इसमें सिद्धि प्राप्ति के हेतु तथा जत्ती अंतर परिणाम संस्कारों की शून्यता वासनाएं और उनका स्वरूप गुणों का वर्णन चित् का वर्णन धर्म मेघ समाधि और केवल व्यवस्था के बारे में बताया गया है। [https://bgbooks.net/religious/patanjali-yoga-sutras-pdf/ '''अधिक पढ़े''']
 
इन पादों में योग अर्थात् ईश्वर-प्राप्ति के उद्देश्य, लक्षण तथा साधन के उपाय या प्रकार बतलाये गये हैं और उसके भिन्न-भिन्न अंगों का विवेचन किया गया है। इसमें चित्त की भूमियों या वृत्तियों का भी विवेचन है। इस योग-सूत्र का प्राचीनतम भाष्य [[वेदव्यास]] का है जिस पर वाचस्पति का वार्तिक भी है। योगशास्त्र नीति विषयक उपदेशात्मक काव्य की कोटि में आता है।<ref>{{cite web|url= http://www.pustak.org/bs/home.php?mean=65047|title= योग-दर्शन|access-date= [[१ फ़रवरी]] [[2008]]|format= पीएचपी|publisher= भारतीय साहित्य संग्रह|language= |archive-url= https://web.archive.org/web/20150924083327/http://www.pustak.org/bs/home.php?mean=65047|archive-date= 24 सितंबर 2015|url-status= dead}}</ref>
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