"बुंदेली भाषा": अवतरणों में अंतर

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== बुंदेली का स्‍वरूप ==
बुंदेलखंड की पाटी पद्धति में सात स्वर तथा ४५ व्यंजन हैं। कातन्त्र व्याकरण ने संस्कृत के सरलीकरण प्रक्रिया में सहयोग दिया। बुंदेली पाटी की शुरुआत ओना मासी घ मौखिक पाठ से प्रारंभ हुई। विदुर नीति के श्लोक विन्नायके तथा चाणक्य नीति चन्नायके के रूप में याद कराए जाते थे। वणिक प्रिया के गणित के सूत्र रटाए जाते थे। नमः सिद्ध मने ने श्री गणेशाय नमः का स्थान ले लिया। कायस्थों तथा वैश्यों ने इस भाषा को व्यवहारिक स्वरुप प्रदान किया, उनकी लिपि मुड़िया निम्न मात्रा विहीन थी। स्वर बैया से अक्षर तथा मात्रा ज्ञान कराया गया। चली चली बिजन वखों आई, कां से आई का का ल्याई ... वाक्य विन्यास मौलिक थे। प्राचीन बुंदेली विंध्‍येली के कलापी सूत्र काल्पी में प्राप्त हुए हैं।
==कुछ प्रसिध्दप्रसिद्ध शब्द==
*लत्ता=कपड़े
*अबई-अबई = अभी-अभी
*मोड़ा/मोड़ी - लड़का/लड़की
*हमाओ - हमारा
*करिये- करना (तू के उच्चारण में)
*तैं-तू
*हम-मैं
*इते, यहाँ
*सई, सच
*सपन्ना , स्नानघर
 
जिसकोजिसे मराठी आती है वो ऊपर दिए गए शब्दों में 40% शब्द मराठी में आज भी इस्तेमाल होते हैहैं और जान जाएगा कि बुन्देली और मराठी का रिश्ता हिंदी से भी ज्यादा जुड़वा है।
 
==क्षेत्रीय बुंदेलखंडी==
बेनामी उपयोगकर्ता