"विधिक व्यक्तित्व": अवतरणों में अंतर

आकार में कोई परिवर्तन नहीं ,  1 माह पहले
टैग: मोबाइल संपादन मोबाइल एप सम्पादन Android app edit
टैग: मोबाइल संपादन मोबाइल एप सम्पादन Android app edit
 
प्रोफेसर पेटन का कहना है कि बुद्धिमत्ता से प्रयुक्त न करने पर कोई भी एक सिद्धांत गलत परिणामों की ओर ले जा सकता है। इसलिये इन सिद्धांतों को प्रयुक्त करते समय यह ध्यान में रखा जाए कि ये उसी उद्देश्य के लिए प्रयुक्त हों जिसके लिए इन्हें प्रतिपादित किया गया। दूसरे अर्थों में किसी राजनीतिक दर्शन को समर्थित करने के लिए इन्हें प्रयुक्त न किया जाए।
 
व्यवहार में न्यायालयों ने किसी भी सिद्धांत का अनुकरण नहीं किया यद्यपि प्रारंभ में संस्थान कदाचित् कल्पना सिद्धांत के कारण अपराध से बचते रहे। अब उस क्षेत्र के लिए भी वे उत्तरदायी है। कर्मचारियों के अपराधों (टोर्ट) के लिए भी इन्हें उत्तरदायी ठहराया जाता है। इस विचार का कि संस्थान उन्हीं व्यक्तियों के कार्यों के लिए उत्तरदायी हैं जो उनके लिए कार्य करते हैं और सोचते हैं, अभी निश्चित निर्णय नहीं हो पाया है। यह अनिश्चित स्थिति कंपनी को उसके हिस्सेदारों के समरूप समझाने की न्यायालयों की नीति की है। भारतीय सर्वोच्च न्यायालय ने हिस्सेदारों को कंपनी के समरूप समझने की बात को एक मामले में अस्वीकार कर दिया जब कि एक हिस्सेदार ने कंपनी के मूलभूत अधिकारांअधिकारों की अवहेलना की शिकायत की।
 
== बाहरी कड़ियाँ ==
402

सम्पादन