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'''अर्धायु काल''', क्षय होते हुए किसी तत्त्व का वो काल होता है; जिसमें वो [[तत्त्व]] मूल मात्रा से आधा हो जाये। ये नाम पहले अस्थिर परमाणुओं([[रेडियोधर्मी]] क्षय) के लिए प्रयोग किया जाता था, किन्तु अब इसे किसी भी निश्चित क्षय वाले तत्त्व के लिए प्रयोग किया जाता है।
 
यह मूल शब्द [[१९०७]] में अर्धायु काल के नाम से प्रयुक्त हुआ था, जिसे बाद में [[१९५०]] में घटा कर [[अर्धायु]] कर दिया गया।
 
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