"अंतरिक्ष शटल" के अवतरणों में अंतर

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[[Image:Shuttle Patch.svg|thumb|left|अंतरिक्ष शटल कार्यक्रम का चिह्न]]
[[Image:Atlantis launch plume edit.jpg|thumb|left|अटलांटिस अंतरिक्ष शटल लॉन्च, २००१। सूर्य कैमरे के पीछे है व आगे परछाईं में चंद्रमा दर्शनीय है।]]
आरंभिक एयरक्राफ्ट एक बार ही प्रयोग हो पाया करते थे। शटल के ऊपर एक विशेष प्रकार की तापरोधी चादर होती है। यह चादर [[पृथ्वी]] की कक्षा में उसे [[घर्षण]] से पैदा होने वाली [[ऊष्मा]] से बचाती है। इसलिए इस चादर को बचाकर रखा जाता है। यदि यह चादर न हो या किसी कारणवश टूट जाए, तो पूरा यान मिनटों में जलकर खाक हो जाता है। चंद्रमा पर कदम रखने वाले अभियान के अलावा, ग्रहों की जानकारी एकत्र करने के लिए जितने भी स्पेसक्राफ्ट भेजे जाते है, वे रोबोट क्राफ्ट होते है।<ref name="हिन्दुस्तान"/> कंप्यूटर और रोबोट के द्वारा धरती से इनका स्वचालित संचालन होता है। चूंकि इन्हें धरती पर वापस लाना कठिन होता है, इसलिए इनका संचालन स्वचालित रखा जाता है। चंद्रमा के अलावा अभी तक अन्य ग्रहों पर भेजे गये शटल इतने लंबे अंतराल के लिये जाते हैं, कि उनके वापस आने की संभावना बहुत कम या नहीं होती है। इस श्रेणी का शटल [[वॉयेजर १]] एवं [[वॉयेजर २]] रहे हैं। स्पेस शटल [[डिस्कवरी अंतरिक्ष यान|डिस्कवरी]] कई वैज्ञानिकों के साथ [[अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन]] की मरम्मत करने और अध्ययन के लिए अंतरिक्ष में गया था।