"सहारनपुर" के अवतरणों में अंतर

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छो (सहारनपुर मे अनेकानेक संस्थानों का परिचय देने हेतु कुछ वेब लिंक यहां उपलब्ध हैं।)
 
'''सहारनपुर''' [[उत्तर प्रदेश]] [[प्रान्त]] का एक [[शहर]] है।
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== नामकरण ==
== सहारनपुर नाम कैसे मिला ? ==
 
इतिहासकारों व खनन से प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर यह स्पष्ट हो चुका है कि सिंधु घाटी की सभ्यता का विस्तार सहारनपुर तक भी था। सहारनपुर का नाम भी बदलता रहा है और इतिहासकार इस बारे में एक मत नहीं हो पाये हैं कि सहारनपुर को इसका वर्तमान नाम कैसे मिला। जनश्रुति के अनुसार एक सूफी संत शाह हारून चिश्ती के नाम पर यह क्षेत्र सहारनपुर के नाम से जाना जाने लगा था। सन्‌ 1340 में पांवधोई नदी के तट पर शाह हारून चिश्ती नाम के प्रसिद्ध सूफी संत के होने की सूचना मुहम्मद तुग़लक को मिली थी और बताया जाता है कि तुग़लक ने संत से मिलने के बाद फरमान जारी कर दिया था कि यह स्थान शाह हारूनपुर के रूप में जाना जाये। इसके विपरीत, कुछ इतिहासकारों की मान्यता है कि सहारनपुर को इसका ये नाम राजा साहरनवीर सिंह के नाम से मिला जिन्होंने अकबर के आदेश पर यहां चारदीवारी और चार दरवाज़ों से घिरी एक नगरी बसाई। पांवधोई नदी के तट के किनारे - किनारे नक्खासा, रानी बाज़ार, शाह बेहलोल और लक्खी गेट इस नगर के अंग थे और सराय गेट, माली गेट, बूड़िया गेट तथा लक्खी गेट - ये चार दरवाज़े थे। इनके अवशेष आज भी उपलब्ध हैं।
 
 
== इतिहास ==
== सहारनपुर कितना पुराना है? ==
 
सहारनपुर का परिचय समय - समय पर अनेकानेक विद्वानों द्वारा दिया जाता रहा है। सहारनपुर के शाकुम्भरी तीर्थ का प्राचीनतम उल्लेख आचार्य विष्णुगुप्त ( चाणक्य ) द्वारा लगभग 2500 वर्ष पूर्व किया गया बताया जाता है। सहारनपुर के बहादराबाद, अंबाखेड़ी, बड़गांव, हुलास, नसीरपुर आदि क्षेत्रों में पुरातात्विक सर्वेक्षणों के आधार पर भी सहारनपुर (तत्कालीन उशीनर) को सिंधु घाटी की सभ्यता से जोड़ा गया है। सन्‌ 1803 ई. में सहारनपुर अंग्रेज़ी राज्य के अधिकार में आ गया था। इंपीरियल गज़ेटियर ऑफ इंडिया, 1909 (Imperial Gazetteer of India, 1909) में सहारनपुर का विशद परिचय दिया गया है और इसे सहारनपुर के बारे में आधिकारिक ग्रंथ माना जाता है। एक सर्वकालिक महत्व का ग्रंथ "सहारनपुर संदर्भ" के रूप में सितंबर 1986 से हम सब के उपयोग हेतु घर-घर में मौजूद है। इस अत्यन्त महत्वपूर्ण ग्रंथ को हम सब तक लाने का श्रेय प्रसिद्ध इतिहासकार श्रद्धेय श्री के.के. शर्मा को है जिन्होंने 1979 से आरंभ किये अपने इस भागीरथ प्रयास को सितंबर, 1986 में सफलतापूर्वक संपन्न किया। सहारनपुर के भौगोलिक सन्दर्भ और प्रागैतिहासिक संस्कृतियों से आरंभ करते हुए विद्वान इतिहासकार श्री के. के. शर्मा ने अपने - अपने विषय के लब्धप्रतिष्ठ विद्वानों से लेख आमंत्रित करते हुए सहारनपुर के जन-जीवन के लगभग प्रत्येक पक्ष का विस्तृत परिचय दिया है। आज 2009 में सूचना प्रौद्योगिकी के युग में, डिजिटल तकनीक से लैस होकर हम इस महान रचना में केवल यह कमी निकाल सकते हैं कि इसका अगला संस्करण 1986 से लेकर आज तक नहीं निकाला जा सका अतः इन 23 वर्षों की अवधि की कोई जानकारी इसमें शामिल नहीं है और यह भी कि इस ग्रंथ में चित्रों का घोर अभाव है। पर घोर धनाभाव से जूझते हुए 554 पृष्ठों का ग्रंथ 1986 के कालखण्ड में प्रकाशित किया जा सका - यह स्वयं में एक चमत्कार से कम नहीं है। उस जमाने में जानकारियों के आदान प्रदान के लिये इंटरनेट और वेबसाइट (internet / websites) जैसी सुविधायें कहां थीं?
 
 
[[श्रेणी: उत्तर प्रदेश]]
[[श्रेणी: शहर]]
[[श्रेणी: उत्तर प्रदेश के शहर]]
[[श्रेणी: भारत के शहरसहारनपुर]]
 
[[bpy:শাহরানপুর]]
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