"खंड-२" के अवतरणों में अंतर

1,361 बैट्स् नीकाले गए ,  10 वर्ष पहले
सम्पादन सारांश रहित
(New page: रश्मिरथी / प्रथम सर्ग / भाग 4 कवि: रामधारी सिंह "दिनकर" ~*~*~*~*~*~*~*~ 'पूछो मेरी जा...)
 
रश्मिरथी / प्रथम सर्ग / भाग 4
कवि: रामधारी सिंह "दिनकर"
 
~*~*~*~*~*~*~*~
 
'पूछो मेरी जाति , शक्ति हो तो, मेरे भुजबल से'
मलिन, मगर, इसके आगे हैं सारे राजकुमार।
 
 
रश्मिरथी / प्रथम सर्ग / भाग 5
कवि: रामधारी सिंह "दिनकर"
 
~*~*~*~*~*~*~*~
 
'करना क्या अपमान ठीक है इस अनमोल रतन का,
जनता निज आराध्य वीर को, पर लेती पहचान।
 
रश्मिरथी / प्रथम सर्ग / भाग 6
कवि: रामधारी सिंह "दिनकर"
 
~*~*~*~*~*~*~*~
 
लगे लोग पूजने कर्ण को कुंकुम और कमल से,
कहते हुए -'पार्थ! पहुँचा यह राहु नया फिर कौन?
 
रश्मिरथी / प्रथम सर्ग / भाग 7
From Hindi Literature
Jump to: navigation, search
कवि: रामधारी सिंह "दिनकर"
 
~*~*~*~*~*~*~*~
 
'जनमे नहीं जगत् में अर्जुन! कोई प्रतिबल तेरा,
उजड़ गये हों स्वप्न कि जैसे हार गयी हो दाँव,
 
नहीं उठाये भी उठ पाते थे कुन्ती के पाँव।
 
"http://hi.literature.wikia.com/wiki/%E0%A4%B0%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A4%A5%E0%A5%80_/_%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A5%E0%A4%AE_%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%97_/_%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%97_7" से लिया गया
Please note that all contributions to Hindi Literature are considered to be released under the GNU Free Documentation License (see Project:Copyrights for details). If you don't want your writing to be edited mercilessly and redistributed at will, then don't submit it here.
You are also promising us that you wrote this yourself, or copied it from a public domain or similar free resource. DO NOT SUBMIT COPYRIGHTED WORK WITHOUT PERMISSION!
504

सम्पादन