"जीवनचरित" के अवतरणों में अंतर

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आधुनिक गद्य काल में तो अंग्रेजी, फ्रेंच, जर्मन आदि पश्चिमी भाषाओं के साथ साथ [[हिंदी]], [[बंगला]], [[मराठी]] आदि में भी प्रसिद्ध व्यक्तियों के जीवनचरित लिखने की प्रवृत्ति यथेष्ट रूप से बढ़ती जा रही है। आत्मकथाओं में [[महात्मा गांधी]] की "[[सत्य के प्रयोग]]" शीर्षक आत्मकथा, देशरत्न स्व. [[राजेन्द्र प्रसाद]] की आत्मकथा और [[जवाहरलाल नेहरू]] की आत्मकथा, इस प्रसंग में विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं।
 
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