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'''हिन्दू धर्म''' ([[संस्कृत भाषा|संस्कृत]]: सनातन धर्म) विश्व के सभी धर्मों में सबसे पुराना धर्म है। ये वेदों पर आधारित धर्म है, जो अपने अन्दर कई अलग अलग उपासना पद्धतियाँ, मत, सम्प्रदाय, और दर्शन समेटे हुए है। अनुयायियों की संख्या के आधार पर ये दुनियाँविश्व का तीसरा सबसे बड़ा धर्म है, संख्या के आधार पर इसके अधिकतर उपासक [[भारत]] में हैं और प्रतिशत के आधार पर नेपाल में है। हालाँकि इसमें कई देवी-देवताओं की पूजा की जाती है, लेकिन वास्तव में यह एकेश्वरवादी धर्म है।<ref>{{Cite web |title=श्रीमद्भगवद् गीता |url=http://khabar.ndtv.com/MantrasListing.aspx?SectionName=Shrimadbhagwat%20Gita |quote=श्रीमद्भगवद्‌ गीता हिन्दू धर्म के पवित्रतम ग्रन्थों में से एक है। भगवान श्रीकृष्ण ने गीता का सन्देश पाण्डव राजकुमार अर्जुन को सुनाया था। यह एक स्मृति ग्रन्थ है। इसमें एकेश्वरवाद की बहुत सुन्दर ढंग से चर्चा हुई है। }}</ref><ref> {{Cite web |title=श्रीमद्भगवद् गीता सातवाँ अध्याय |url=http://www.gitapress.org/books/sadhak/1014/Sadhak_Sanjivani_7.pdf |quote=यो यो यां यां तनुं भक्तः श्रद्धयार्चितुमिच्छति। तस्य तस्याचलां श्रद्धां तामेव विदधाम्यहम्॥७- २१॥}}</ref>
<ref> {{Cite web |title=श्रीमद्भगवद् गीता सातवाँ अध्याय |url=http://www.gitapress.org/books/sadhak/1014/Sadhak_Sanjivani_7.pdf |quote=स तया श्रद्धया युक्तस्तस्याराधनमीहते।
लभते च ततः कामान्मयैव विहितान्हि तान्॥७- २२॥}}</ref>
 
हिन्दी में इस धर्म को [[सनातन धर्म]] अथवा [[वैदिक धर्म]] भी कहते हैं। [[इण्डोनेशिया]] में इस धर्म का औपचारिक नाम "[[हिन्दु आगम]]" है। हिन्दू केवल एक धर्म या सम्प्रदाय ही नही है अपितु जीवन जीने की एक पद्धति है " हिंंसायामहिंसायाम दूयते या सा हिन्दु " {{टंकणगत अशुद्धि}}अर्थात् जो अपने मन, वचन, कर्म से हिंसा से दूर रहे वह हिन्दू है और जो कर्म अपने हितों के लिए दूसरों को कष्ट दे वह हिंसा है।
 
[[नेपाल]] विश्व का एक मात्र आधुनिक हिन्दू राष्ट्र था (नेपाल के लोकतान्त्रिक आंदोलन के पश्चात् के अंतरिम संविधान में किसी भी धर्म को राष्ट्र धर्म घोषित नहीं किया गया है। नेपाल के हिन्दू राष्ट्र होने या ना होने का अंतिम फैसला संविधान सभा के चुनाव से निर्वाचित विधायक करेंगे)।
== मुख्य सिद्धान्त ==
[[चित्र:Hindutempelcolombo.JPG|thumb|right|हिंदू मंदिर, श्री लंका]]
हिन्दू धर्म में कोई एक अकेले सिद्धान्तों का समूह नहीं है जिसे सभी हिन्दुओं को मानना ज़रूरी है। ये तो धर्म से ज़्यादा एक जीवन का मार्ग है। हिन्दुओं का कोई केन्द्रीय चर्च या धर्मसंगठन नहीं है, और न ही कोई "पोप"। इसकीइसके अन्तर्गत कई मत और सम्प्रदाय आते हैं, और सभी को बराबर श्रद्धा दी जाती है। धर्मग्रन्थ भी कई हैं। फ़िर भी, वो मुख्य सिद्धान्त, जो ज़्यादातर हिन्दू मानते हैं, हैं इन सब में विश्वास : धर्म (वैश्विक क़ानून), कर्म (और उसके फल), पुनर्जन्म का सांसारिक चक्र, मोक्ष (सांसारिक बन्धनों से मुक्ति--जिसके कई रास्ते हो सकते हैं), और बेशक, '''ईश्वर'''। हिन्दू धर्म स्वर्ग और नरक को अस्थायी मानता है। हिन्दू धर्म के अनुसार संसार के सभी प्राणियों में आत्मा होती है। मनुष्य ही ऐसा प्राणी है जो इस लोक में पाप और पुण्य, दोनो कर्म भोग सकता है, और मोक्ष प्राप्त कर सकता है। हिन्दू धर्म में चार मुख्य सम्प्रदाय हैं : वैष्णव (जो विष्णु को परमेश्वर मानते हैं), शैव (जो शिव को परमेश्वर मानते हैं), शाक्त (जो देवी को परमशक्ति मानते हैं) और स्मार्त (जो परमेश्वर के विभिन्न रूपों को एक ही समान मानते हैं)। लेकिन ज्यादातर हिन्दू स्वयं को किसी भी सम्प्रदाय में वर्गीकृत नहीं करते हैं। प्राचीनकाल और मध्यकाल में शैव, शाक्त और वैष्णव आपस में लड़ते रहते थे. जिन्हें मध्यकाल के संतों ने समन्वित करने की सफल कोशिश की और सभी संप्रदायों को परस्पर आश्रित बताया.
 
; संक्षेप में, हिन्‍दुत्‍व के प्रमुख तत्त्व निम्नलिखित हैं-
 
1. ईश्वर एक नाम अनेक
4. हिन्दुत्व का लक्ष्य स्वर्ग-नरक से ऊपर
 
5. हिन्दुओं में कोई एक पैगम्बर नहीं है, बल्कि अनेकों पैगंबर हैं.
 
6. धर्म की रक्षा के लिए ईश्वर बार-बार पैदा होते हैं
6. क्रिया की प्रतिक्रिया होती है
 
7. परोपकार: पुण्यायपुण्य पापायहै परपीडनम्दूसरों के कष्ट देना पाप है.
 
8. प्राणि-जीवमात्र की सेवा ही परमात्मा की सेवा है
 
9. स्त्री आदरणीय है
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