"गोल्डन काफ़ (सोने का बछड़ा)": अवतरणों में अंतर

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[[File:GoldCalf.jpg|right|thumbnail|300px|निकोलस पौसिन द्वारा स्वर्ण बछड़े की आराधना: ग्रीको-रोमन भदचलन से प्रभावित कल्पना]]
इब्रानी (हिब्रू) बाइबिल के अनुसार, द '''गोल्डेन काफ़''' (עֵגֶּל הַזָהָב ‘ēggel hazâhâḇ) [[मूसा|मोज़ेज़ (मुसों)]] जब माउंट सिनाई पर चले गए तब उनकी अनुपस्थिति के दौरान इस्राएलियों को संतुष्ट करने के लिए उनके भाई हारून (एरॉन) द्वारा बनवाई गई मूर्ति (पंथ अथवा सम्प्रदाय की प्रतिकृति) थी. द काफ़ (बछड़ा) के जरिए इस्राएल के ईश्वर का शारीरिक प्रतिनिधित्व अभिप्रेत था, और इसीलिए, इस्राएल को दोबारा बुत परस्ती (मूर्तिपूजा) में शामिल करने की गलती की जा रही थी एवं ईश्वर की शारीरिक सत्ता का होना आरोपित किया जा रहा था.
==बाइबिल का कथा-सारा==
===[[तोरा|टोरा]]===
 
[[File:The Worship of the Golden Calf (Filippino Lippi).jpg|250px|thumb|right|फिलिपिनो लिपि द्वारा स्वर्ण बछड़ा का पूजा (1457-1504)]]
जब [[मूसा|मूसा]] दस ईश्वरीय-आदेश ([http://bible.cc/exodus/19-20.htm निर्गमन 19:20]) पाने के लिए माउंट सेनाई (सेनाई पर्वत) पर चले गए तब वे इस्राएल को चालीस दिनों और चालीस रातों के लिए छोड़ गए ([http://bible.cc/exodus/24-18.htm निर्गमन 24:18]). इस्राएल को यह डर सताने लगा कि वे लौट कर नहीं आएंगे और उन्होंने हारून से उनके लिए इस्राएल के ईश्वर की मूर्ति बनाने के लिए कहा ([http://bible.cc/exodus/32-1.htm निर्गमन 32:1]). हालांकि, हारून ने इस्राएल के परमेश्वर का प्रतिनिधि बनने से इनकार कर दिया. इस्राएलियों ने हारून को अभिभूत करने के लिए काफी शिकायत की थी, इसलिए उसने उनका अनुपालन किया और इस्राएलियों के कानों की सोने की बालियां इकट्ठी की. उसने उसे पिघलाया और सोने की एक जवान बैल (सांड़) की मूर्ति बनाई. हारून ने बछड़े के सामने एक वेदी भी बनाई और यह घोषणा भी कर दी कि इस्राएल के लोगों, ये तुम्हारे ईश्वर हैं, जो तुमलोगों का मिस्र की जमीन से बाहर ले आया है". और दूसरे ही दिन, इस्राएलियों ने सोने के बछड़े को भेंट अर्पित की और उत्सव मनाया. मूसा ने जब उन्हें यह सबकुछ करते देखा तो वे उनसे क्रोधित हो गए, उन्होंने उन शिला लेखों को जिसपर ईश्वर ने इस्राएलियों के लिए अपने कानून लिखे थे, ज़मीन पर फेंक दिया.
 
922 ई.पू. में, जब यारोबाम प्रथम ने इस्राएल के उत्तरी राज्य की स्थापना की, उन्होंने दो स्वर्णिम बछड़ो का निर्माण किया और उन्हें बेथेल और दान के मध्य प्रतिस्थापित कर दिया गया. राजाओं में से 1 राजा 12. c26-30 के अनुसार, यारोबाम बालियों के सापेक्ष इस्राएलियों के धार्मिक कर्मकाण्डों का सर्वोक्षण करता है.
 
26 यारोबाम ने मन ही मन विचार किया, "राज्य अब संभवतः दाउद के पास आ जायेगा. 27 के घर की ओर वापस हो जाएगी अगर, इन लोगों ने येरुसलम में जाकर ईश्वर (LORD) के मंदिर बालियां अर्पित नहीं करते, वे लोग पुनः आरोपों को उनके स्वामी यहूदा के राजा रहूबियाम के हवाले कर देंगे. वे मुझे मार डालेंगे और राजा रहूबियाम के पास लौट जाएंगे." 28 सलाह लेने के बाद राजा ने दो स्वर्णिम बछड़े बनवाए. उसने लोगों से कहा, "येरुशलम तक जाना तुम लोगों के वश की बात नहीं. ये लो तुम्हारे इश्वर, इस्राएल, जिन्होंने तुम्हें मिस्र से बाहर लाया." 29 एक को उसने बेथेल में स्थापित कर दिया और दूसरे को दान में. 30 और यही बात पाप हो गई; लोग बेथेल में एक की पूजा करने आए और दूसरे की सुदूर दान में. {{bible verse|1 Kings|12:26-30|NIV}}
 
उसकी प्रमुख चिंता है येरुशलम में बलिदान देने की उनकी प्रकृति, एक ऐसा कर्म जिसके बारे में वह अनुभव करता है कि लोग यहोवा में राजा रहूबियाम के पास लौट जाएंगे जो दक्षिणी राज्य में है. वह स्वर्णिम बछड़े की दृष्टि निरोधक पद्धति के रूप में करता है ताकि वह अपनी सुरक्षा सुनिश्चित कर सके और अपनी पहचान एक राजा के रूप में कायम कर सके. इसके अलावा, वह दो बछड़े की मूर्तियां खड़ी करता है, जिसमें (कुछ व्याख्याओं के अनुसार) उसे [[यरुशलम|येरुशलम]] में राजा सुलैमान द्वारा बनवाए गए करुबों के निकल्प के रूप में चित्रित किया जाता है.<ref>कुगन, पृष्ठ. 117, 2009</ref>