आचार्य विश्वनाथ प्रसाद मिश्र का जन्म काशी के ब्रह्मनाल मुहल्ले में हुआ था। हिन्दी साहित्याकाश में आचार्य मिश्र बहुअधीत अन्वेषक, मार्मिक टीकाकार एवं सुयोग्य पाठ-सम्पादक के रूप में प्रतिष्ठित हैं। उनकी प्रमुख रचनाएं इस प्रकार हैं-

१- वाङ्मय विमर्श

३- हिन्दी का सामयिक साहित्य

४- बिहारी की वाग्विभूति

५- नीला कण्ठ उजले बोल

६- काव्यांग कौमुदी

७- गोसाईं तुलसीदास

८- केशव ग्रंथावली (सं.)

९- रामचरितमानस (सं.)


आचार्य मिश्र के कर्तृत्व का सर्वोच्च शिखर पाठ-सम्पादन के क्षेत्र में है। उन्होंने रीतिकालीन आकर ग्रन्थों के पाठ का निर्धारण करने के साथ-साथ रामचरित मानस के सुप्रसिद्ध 'काशिराज संस्करण' का पाठ-सम्पादन किया। हिन्दी विभाग, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय उनके अवदान पर 'आचार्य विश्वनाथ प्रसाद मिश्र के प्रदेय का अनुशीलन : पाठ-सम्पादन का विशेष सन्दर्भ विषयक शोध-कार्य करा रहा है।

मिश्रजी ने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग तथा काशी नागरी प्रचारिणी सभा जैसी संस्थाओं से आजीवन संबद्ध रहकर हिन्दी की जो सेवा की उससे हिन्दी-जगत् सदैव लभान्वित होता रहेगा।