विश्व स्तनपान सप्ताह,प्रत्येक वर्ष अगस्त माह के पहले सप्ताह प्रताप 1 अगस्त से 7 अगस्त[1] तक मनाया जाता है इसका उद्देश्य महिलाओं को स्तनपान एवं कार्य को दृढ़तापूर्वक एकसाथ करने का समर्थन देता है साथ ही इसका यह उद्देश्य है कि कामकाजी महिलाओं को उनके स्तनपान संबंधी अधिकार के प्रति जागरूकता प्रदान करना साथ ही कार्यालयों में भी इस प्रकार का माहौल बनाना की स्तनपान कराने वाली महिलाओं को किसी भी प्रकार की असुविधाएं ना हो डब्ल्यूएचओ की सिफारिश के अनुसार नवजात शिशु के लिए पीला गाढ़ा चिपचिपा युक्त मां का के स्तन का दूध कोलेस्ट्रम संपूर्ण आहार होता है जिसे बच्चे के जन्म के तुरंत बाद 1 घंटे के भीतर ही शुरू कर देना चाहिए सामान्यता बच्चे को 6 महीने की अवस्था तक स्तनपान कराने की अनुशंसा की जाती है शिशु को 6 महीने की अवस्था और 2 वर्ष अथवा उससे अधिक समय तक स्तनपान कराने के साथ-साथ पौष्टिक पूरक आहार भी देना चाहिए स्तन में दूध पैदा होना एक नैसर्गिक प्रक्रिया है जब तक बच्चा दूध पीता है तब तक स्तन में दूध पैदा होता है एवं बच्चे के दूध पीना छोड़ने के पश्चात कुछ समय बाद अपने आप ही स्तन से दूध बनना बंद हो जाता है। स्तनपान से होने वाले फायदे:-स्तनपान कराने से मां और शिशु दोनों को फायदा होता है। शिशु को होने वाले फायदे: १.अच्छा और सम्पूर्ण आहार होता है मां का दूध। २.दूध में पाया जाने वाला कोलेस्ट्रम शिशु को प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करता है। ३.शिशु को रोगों से बचाता है। ४.शिशु की वृद्धि अच्छे से होती है।

स्तनपान करता शिशु

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सन्दर्भसंपादित करें

  1. "भारत सरकार की आधिकारिक वेबसाइट". मूल से 15 जुलाई 2017 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 6 अप्रैल 2017.